पूर्णिया : नगर निगम की तीसरी बोर्ड बैठक, कई अहम फैसलों पर विचार - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 21 जून 2019

पूर्णिया : नगर निगम की तीसरी बोर्ड बैठक, कई अहम फैसलों पर विचार

purnia-corporation-meetingपूर्णिया : नगर निगम की तीसरी बोर्ड बैठक आज सभागार में होगी। इस बैठक में गत दिनों हुई बोर्ड की दो बैठक व सशक्त स्थाई समिति की तीन बैठकों में लिए गए निर्णयों का न सिर्फ अवलोकन होगा बल्कि कई पेंडिंग पड़ी योजनाओं पर मुहर लगने की भी संभावना है। हालांकि कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर मेयर सविता देवी व नगर आयुक्त विजय कुमार सिंह के द्वारा पूर्व में लिए गए निर्णयों पर पार्षदों ने घेरने की तैयारी भी की है। बता दें कि नगर आयुक्त के द्वारा 15 जून को इस बाबत ज्ञापांक संख्या 472 सभी वार्ड पार्षदों को जारी किया गया। जिसमें 27 दिसंबर 2018 व 20 मई 2019 को हुई बोर्ड बैठक व 12 फरवरी 2019, 18 मार्च 2019 व 04 जून 2019 को हुई सशक्त स्थाई समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों की संपुष्टि पर विचार करने की बात कही गई है। इसके अलावे नगर निगम के स्थाई संरचनाओं मसलन कार्यालय परिसर, मार्केट भवन के ऊपर मासिक किराये के आधार पर इच्छुक एजेंसी जिओ (jio) को मोबाइल टावर लगाने के लिए अनुमति देने पर विचार, प्रधानमंत्री आवास एवं राजीव आवास याेजना की प्रगति को गति प्रदान करने के लिए दक्ष कर्मियों की सेवा आउटसोर्सिंग के जरिये लिए जाने पर भी विचार व अन्यान्य प्रस्तावों पर भी विचार किए जाने की बात कही गई है। जिस पर पार्षदों के तेवर तल्ख हैं। इस संबंध में वार्ड 22 की पार्षद सरिता राय व वार्ड नंबर 8 के पार्षद पोलो पासवान ने इन तमाम मुद्दों को हाथोंहाथ लिया है और बाकायदा लिखित आवेदन नगर निगम के पदाधिकारी व मेयर को सौंपने की बात कही है। 

...इन मुद्दों पर क्या है पार्षदों का तर्क : 
इन सभी मुद्दों पर पार्षदों का कहना है कि जब आज होने वाली बैठक के एजेंडे में स्पष्ट रूप से जिओ कंपनी का नाम शामिल किया गया है तो मंशा स्पष्ट है। जबकि यह पूरी तरह से गलत है और इसके लिए किसी खास कंपनी को चिन्हित करने के बजाए सार्वजनिक रूप से निविदा की प्रक्रिया की जानी चाहिए ताकि निगम के राजस्व में इजाफा हो सके और निगम की कार्यशैली में भी पारदर्शिता आ सके। इसके अलावे उनका तर्क है कि जब पूर्व से बहाल कार्यरत आवास कर्मियों से सेवा ली जा रही थी तो नए सिरे से बहाली की प्रक्रिया का क्या औचित्य है। उनका कहना है कि जब इन योजनाओं के सफलतापूर्वक संचालन के लिए कर्मी जो लगातार 02 वर्षों से कार्य कर रहे थे और उनलोगों के द्वारा लगभग 3900 से ज्यादा अभिलेखों को संधारित किया गया तो आखिर किस परिस्थिति में 5 अक्टूबर 2018 को प्रशासनिक एवं निगम की वित्तीय स्थिति को दर्शाते हुए बिना किसी आरोप के उन्हें पदमुक्त कर दिया गया था। जबकि आज भी निगम की आर्थिक स्थिति में कुछ खास सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में नए कर्मियों को बहाल करने के बजाए पूर्व से कार्यरत कर्मियों को ही दोबारा क्यों न सेवा करने का मौका दिया जाए। यही नहीं इन पार्षदों का कहना है कि बजट को लेकर एकल प्रस्ताव लाए जाने का प्रावधान है न कि सशक्त स्थाई समिति से पारित बजट की कॉपी के आधार पर। बता दें कि पूर्व में लोकसभा चुनाव को ले स्थाई समिति की बैठक में आनन फानन में बजट को तत्काल पारित कराया गया था लेकिन बोर्ड बैठक में इसका अनुमोदन होना बाकी है। पार्षदों का कहना है कि सशक्त स्थाई समिति के सदस्यों का नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 84 के तहत कोई सुझाव या आपत्ति प्राप्त है तो वह बजट की छायाप्रति में शामिल किया जाना चाहिए था जो संलग्न नहीं है। 

...प्रस्ताव दर्ज नहीं किए जाने का लगाया आरोप : 
पार्षद सरिता राय का कहना है कि पूर्व की बैठकों में स्थापित संवाद पर अपना पक्ष लिखित या संवाद के माध्यम से रखा गया था। लेकिन उसे दर्ज नहीं किया गया। साथ ही अन्यान्य में जनता और निगम के राजस्व हित में जो जो प्रस्ताव दिए गए उसे दर्ज नहीं किया गया। जो कि एक जनप्रतिनिधि की गरिमा का हनन है। ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर आज होने वाली बैठक में चर्चा होगी। हालांकि एकाध पार्षदों को छोड़ दें तो बाकी पार्षदों की चुप्पी कहीं न कहीं सवाल खड़ा कर रही है।

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