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शुक्रवार, 21 जून 2019

पूर्णिया : स्मार्ट सिटी बनने में साफ सफाई, कचरा प्रबंधन, जलजमाव व पेजयल की समस्या सबसे बड़ी अड़चन

- ये हैं रूकावटें : पैरामीटर पर खरा नहीं उतर पा रहा है पूर्णिया नगर निगम, निगम प्रशासन को करनी होगी मशक्कत 
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पूर्णिया : नगर निगम प्रशासन शहर को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल करने की जद्दोजहद में लगा है। मेयर सविता देवी व नगर आयुक्त विजय कुमार सिंह ने जहां निगम के अधिकारियों और कर्मियों को मुस्तैदी से काम करने की नसीहत दी है वहीं दूसरी ओर एकाध माह के बाद बारिश होने के बाद जो डैमेज होगा उसके कंट्रोल की कोई व्यवस्था फिलहाल नगर निगम के द्वारा नहीं की जा रही है। यही कारण है कि कहीं नाला उफन रहा है तो कहीं आज भी सड़क का निर्माण कार्य नहीं हो सका है। लिहाजा, लोगों में आक्रोश का माहौल पनप रहा है। बता दें कि वार्ड नंबर 28 अंतर्गत खजांची हाट रोड के आसपास रहने वाले लोगों को इन दिनों बरसात के बाद के जैसा नजारा देखने को मिल रहा है। नाले की उड़ाही नहीं होने व कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा नाले को जाम कर देने से नाले का पानी उफनकर सड़क पर आ रहा है। जिससे सड़ांध व गंदगी से लोगों का जीना दूभर हो गया है। बता दें कि इस नाले में शहर के भगेलू साह नाला, कसाई मोहल्ला, सज्जाद कॉलोनी, बाड़ीहाट मोहल्ला समेत आस पास के इलाके के नालों का पानी इसी नाले से होकर गुजरता है। इस बदहाली की चपेट में करीब 500 घरों के लोग हैं। जिन्हें प्रतिदिन इस गंदगी का सामना करना पड़ता है और रमजान में रोजेदारों को इसी गंदगी से होकर नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जाना पड़ा था। इसके बाद भी नगर निगम के पदाधिकारियों व कर्मियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। दीपांकर चटर्जी, सलीम अंसारी, प्रो असगर आलम, नाहिद अंसारी, वकील सफाउर रहमान, अंजुम अंसारी, मजरूल हक, रामचंद्र वर्मा समेत कई अन्य लोगों ने बताया कि यह समस्या विगत एक माह से है। शिकायत भी की गई लेकिन कोई कार्रवाई अब तक नहीं की गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि शहरी क्षेत्र में साफ सफाई, पेयजल सप्लाई, कचरा प्रबंधन, अतिक्रमण, ऑटो स्टैंड व वेंडिंग जोन के अलावा जलजमाव की समस्या से छुटकारा पाए बगैर स्मार्ट सिटी की श्रेणी में कैसे अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। 

...गंदगी का नहीं हुआ निदान : 
शहर में गंदगी का फैलाव किसी भी एंगल से स्मार्ट सिटी बनाने का सपना देखने वालों के लिए बड़ी चुनौती है। शहर की गंदगी को दूर करने के लिए नगर निगम के न अधिकारी और न ही कर्मी गंभीर हैं। शहरवासी भी कचरा निस्तारण के लिए पूरी तरह निगम पर ही आश्रित हैं। इतना सब होने के बाद भी जहां तहां कचरा फेंक कर निगम कर्मी और शहर के लोग शहर को और भी गंदा करने में कहां पीछे रहते हैं। कचरा निस्तारण प्रबंधन का भी अभी तक ठोस प्रबंध नगर निगम नहीं कर पाया है। हालांकि गत दिनों पुपरिया में ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट लगाए जाने पर बात तो जरूर बनी थी लेकिन अब तक कार्रवाई कुछ भी नहीं हो पाई है। इसके अलावे बायो कम्पोस्टिंग प्लांट के लिए विभिन्न वार्डों में छह जगहों का भी चयन किया गया है। जिस पर कार्य होना बाकी है। 

...शहरी जल निकासी के लिए बनी योजनाएं भी अधर में लटकीं :
शहर में जलजमाव बड़ी समस्या है। इसका मुख्य कारण जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होना है। शहरी जल निकासी के लिए बनी योजनाएं भी लंबे समय से अधर में लटकी हुई हैं। नाला निर्माण योजनाएं लंबित रहने से जलजमाव शहर की दूसरी सबसे बड़ी की समस्या बनी हुई है। शहर के लालगंज व भगेलु साह मुख्य नाला समेत छोटे छोटे नालों को यदि ससमय दुरूस्त कर दिया गया होता तो बेशक शहर में जलनिकासी की समस्या नहीं रहती। 

...सड़क पर अतिक्रमण व यातायात व्यवस्था खराब : 
शहर में बेतरतीब दुकानों का फैलाव और मकानों का निर्माण यातायात व्यवस्था को ध्वस्त कर रखा है। मुख्य सड़कों का अतिक्रमण भी स्मार्ट सिटी बनने के लिए अनुकूल नहीं है। जहां तहां सड़कों पर ट्रैफिक जाम ने यातायात व्यवस्था को चरमरा कर रख दिया है। शहर के विभिन्न चौक चौराहे पर करीब 16 जगहों पर ऑटो स्टैंड व 11 वेंडिंग जोन बनाने की योजना थी लेकिन अब तक नतीजा सिफर है। 

...कई योजनाओं का हुआ है क्रियान्वयन : 
शहर में नई सरकार बनने के एक साल के दौरान करीब 31 करोड़ रूपए के विकास कार्यों को हरी झंडी दिखाई गई है। बीच में चुनाव होने के कारण कई कार्य रूक गए लेकिन अब इसमें तेजी लाई जा रही है। सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शहर को चार हिस्सों में बांटकर कार्य कराया जाएगा। जहां कहीं से भी गंदगी की शिकायत मिलती है त्वरित कार्रवाई की जाती है। शहर में नई सरकार बनने के बाद काफी परिवर्तन हुआ है। खासकर एलईडी लाइट, डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन, शौचालय निर्माण, सड़क व नाला निर्माण को लेकर कई योजना तैयार की गई है और कार्य भी चल रहा है।  : सविता देवी, मेयर, नगर निगम पूर्णिया।

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