पूर्णिया : जो जैसा है उसको वैसा ही स्वीकार करो : स्वामी विष्णु चैतन्य - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 21 जून 2019

पूर्णिया : जो जैसा है उसको वैसा ही स्वीकार करो : स्वामी विष्णु चैतन्य

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कुमार गौरव । पूर्णिया : आर्ट ऑफ लीविंग यानी जीने की कला...इसमें यह जरूरी नहीं कि सिर्फ वैसे लोग ही जिन्हें थोड़ी बहुत समझ हो उसे स्वीकार किया जाए बल्कि जो जैसा है उसको वैसा ही स्वीकार करो...। इस कला के जरिये इंसान को उसकी उर्जा और उसके महत्व के बारे जानकारी दी जाती है। ताकि वे खुद को पहचान सके कि वो क्या हैं और समाज व इस पृथ्वी के लिए उनकी क्या भूमिका है। उक्त बातें आर्ट ऑफ लीविंग के बिहार प्रभारी स्वामी विष्णु चैतन्य ने पनोरमा स्क्वायर में विशेष बातचीत के क्रम में कही। उन्होंने कहा कि मैं विगत साढ़े 17 वर्षों से आनंद अनुभूति कोर्स के माध्यम से भटके लोगों के जीवन को संवार रहा हूं, लेकिन आजतक कोई भी एेसा इंसान नहीं मिला जिसने इस छह दिवसीय काेर्स को पूरा करके कहा हो कि यह मेरे लिए बेकार है। आज के इस भागदौड़ भरी जिंदगी में जीने की कला से लोग दूर हो रहे हैं। उन्हें संयमित जिंदगी नसीब नहीं हो पा रही है। भटकाव की स्थिति है और ऐसे में यदि एक ऐसा प्लेटफॉर्म जहां उन्हें कम समय में योग, आसन व जीने की कला के माध्यम से नई जिंदगी मिल रही है तो इससे बढ़कर और खुशी की बात क्या हो सकती है। 

...क्या है आनंद अनुभूति शिविर : 
इस आनंद अनुभूति शिविर में लोगों को छह दिनों में योग, आसन व खान पान के बारे पूरी जानकारी दी जाती है। फिर इसके तकनीक से भी रूबरू कराया जाता है। सुदर्शन क्रिया से सांस पर नियंत्रण और हृदय शुद्धिकरण की प्रक्रिया सिखाई जाती है। जो कि अन्य किसी भी शिविर में संभव नहीं है। यही कारण है कि आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक व प्रणेता श्री श्री रविशंकर जी महाराज के सानिध्य में विश्व के करीब 157 देशों में यह शिविर लगाई जा रही है और लोगों को जीने की कला से रूबरू कराया जा रहा है। स्वामी जी ने बताया कि पनोरमा सिटी में 25 से 30 जून तक आनंद अनुभूति शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सुबह और शाम 06:00 बजे से 08:30 बजे दो चरणों में लोगों को इस कोर्स के जरिये जीने की कला सिखाई जाएगी। 

...तनावपूर्ण जिंदगी से मिलती है राहत : 
स्वामी जी पूरे विश्वास के साथ कहते हैं कि मैं पहले पायलट था लेकिन इस कोर्स को करने के बाद पता चला कि मेरा वजूद इस कार्य के लिए नहीं बल्कि पारलौकिक कार्यों के लिए है। इसलिए मैंने आर्ट ऑफ लीविंग से जुड़ना पसंद किया और आज तनावमुक्त जिंदगी जीने की कला आम आवाम को बता रहा हूं। उन्होंने कहा कि इस शिविर में जो बातें सिखाई जाती हैं उन्हें अपने घर में नियमित करने से बेशक लोगों को तनाव से मुक्ति मिल जाती है और लोग सुकून भरी जिंदगी जीते हैं।

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