वाराणसी के संक्रमित एसीएमओ की जगह दे दिया दूसरे का शव - Live Aaryaavart

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बुधवार, 12 अगस्त 2020

वाराणसी के संक्रमित एसीएमओ की जगह दे दिया दूसरे का शव

  • लापरवाही का आलम यह है कि बीएचयू प्रषासन पर सीएम योगी का भी नहीं है खौफ 
  • एसीएमओ के परिजनों को करना पड़ा दो शव का अंतिम संस्कार 
  • दर्ज कराएंगे मुकदमा, सीएमओ कार्यालय ने मानी अपनी गलती 
  • एसीएमओ डॉक्टर जंग बहादुर का उपचार के दौरान हो गया था निधन 
  • हरिश्चंद्र घाट पर अंत्येष्टि के समय पहुंचे परिजन 

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वाराणसी (सुरेश गांधी) । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कोरोना आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। खास बात यह है कि कोहराम मचा रहे कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों के साथ ही मरने वालों की तादाद भी हर दिन बढ़ रही है। इसके आतंक से संक्रमित मरीज और उनके परिजन तो खौफजदा तो है ही, चिकित्सक एंव जांच टीम कुछ इस कदर डरे-सहमें है कि मरीज का इलाज भी सही ढंग से नहीं कर रहे है। जबकि बीएचयू की लापरवाही पर कैबिनेट मंत्री सुरेष खन्ना सहित सीएम योगी लगातार चेतावनी देते रहे है।  आलम यह है कि डाक्टर दूर से ही मरीजों को देख रहे है और अंड-बंड दवाएं दे रहे है। इसके चलते कई मरीजों की मौत भी हो चुकी है। परिजन चीख-चीख कर डाक्टर की लापराही का रोना रो रहे है, लेकिन प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंग रहा है। कुछ ऐसा ही जांच टीम का भी है, वे भी इतनी हड़बड़ी में है कि पाॅजिटिव मरीज को निगेटिव और निगेटिव को पाॅजिटिव बता रहे है। इसके शिकार भाजपा विधायक सौरभ श्रीवास्तव ही नहीं दर्जनों लोग हो चुके है, जिन्हें एक नहीं कई बार चांच करानी पड़ी। हद तो तब हो गयी जब अपने ही मुखिया डिप्टी चीफ मेडिकल अधिकारी (एसीएमओ) की जगह अस्पताल प्रशासन ने किसी और का शव दे दिया। बाद में अस्पताल से डिप्टी सीएमओ का शव हरिश्चंद्र घाट भेजा गया, तब जाकर डिप्टी सीएमओ की अंत्येष्टि हो सकी।  बता दें, बीएचयू अस्पताल के कोविड 19 वार्ड में लगातार लापरवाही के मामले उजागर हो रहे हैं। बुधवार को भी एक और नया कारनामा उजागर हुआ जिसके बाद जमकर हंगामा हुआ। अस्पताल सूत्रों के अनुसार मंगलवार की रात ढाई बजे दो लोगों की मौत हुई थी जिसमें पहले स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल सीएमओ डॉ जंगबहादुर की मौत हुई और उसी दौरान एक और मरीज केशव चंद्र श्रीवास्तव की भी मौत हो गयी। दोनों शव को मर्चरी में रखा गया। सुबह बीएचयू के मोर्चरी स्टाफ की ओर से डेथ सर्टिफिकेट के साथ रैपर पैक्ड जंगबाहादुर के डेड बॉडी अंत्येष्टि के लिए कोरोना प्रोटोकॉल के तहत श्मशान घाट पहुंचाई गई थी। जंगबहादुर के परिजनों ने पीपीई किट में लिपटे शव का हरिश्चंद्र घाट पर अंत्येष्टि भी कर दिए।  11.30 बजे केशव चंद्र श्रीवास्तव के परिजनों को शव के लिए बुलाया गया तो उन्होंने मुंह खोलकर दिखाने को कहा और जब शव देखे तो होश उड़ गए। क्योंकि शव उनका नहीं था। इसकी भनक जब स्वास्थ्य टीम को लगी तो महकमे में हड़कंप मच गया। बीएचयू प्रशासन की ओर से इस बात की पुष्टि की गई कि डॉक्टर जंग बहादुर की डेड बॉडी अभी मोर्चरी में ही है। इसके बाद डिप्टी सीएमओ के परिजन बीएचयू पहुंचे और डॉक्टर जंग बहादुर का शव लाकर हरिश्चंद्र घाट पर दुबारा अंत्येष्टि की। जबकि केशव चंद्र मूल रूप से गाजीपुर के रहने वाले थे और कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक पद से रिटायर हुए थे। केशव चंद्र के तीन बेटों में अनुपम श्रीवास्तव बनारस के कई थानों पर प्रभारी रह चुके हैं जिनकी वर्तमान में फ़ूड विजलेंस में तैनाती है। अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि बीएचयू अस्पताल की लापरवाही ने पिता की अंत्येष्टि का अधिकार भी हमसे छीन लिया जिसके कारण पूरा परिवार परेशान है। अनुपम के अनुसार बीएचयू प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे। 

कोरोना ने ली एसीएमओं की जान 
वाराणसी में बतौर डिप्टी सीएमओ तैनात रहे डॉक्टर जंग बहादुर को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उपचार के लिए बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर डॉ. जंग बहादुर को गैलेक्सी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। उसके बाद बीएचयू में शिफ्ट कर दिया गया था। पहले उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी लेकिन पिछली रात टेस्ट में रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई थी। उन पर कोरोना को लेकर बड़ी जिम्मेदारी थी। वे ही अस्पतालों के प्रबंधन, मेडिकल स्टाफ और क्वारनटीन करने का काम देखते थे। अपनी ड्यूटी हुए वे कोरोना संक्रमण के शिकार हो गए। 

32 प्रभारी चिकित्साधिकारियों का इस्तीफा 
जिले के 32 प्रभारी चिकित्साधिकारियों ने अपने पद से बुधवार को सीएमओ को अपना लिखित इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा है कि वे चिकित्सा-सेवा कार्य करते रहेंगे किंतु किसी पद की जिम्मेदारी ग्रहण करके नहीं। चिकित्साधिकारियों ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक अधिकारी स्वास्थ्य कर्मियों के साथ बैठकों में दुव्र्यवहार करते हैं। उन्हें अपने टारगेट की ही परवाह रहती है। स्वास्थ्य कर्मियों के दिन-रात मेहनत को तबज्जो नहीं दी जाती। उनके साथ असम्मानजनक व्यवहार किया जाता है। बताया जाता है कि जिले के 32 चिकित्साधिकारी भेलूपुर स्थित मुख्य चिकित्साधिकारी के कार्यालय पर दोपहर बाद पहुंचे। उन्होंने सीएमओ बीबी सिंह को लिखित सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों पर दुव्र्यवहार करने का आरोप लगाया। इस संदर्भ में उन्होंने एडीएम सिटी द्वारा उनको प्रेषित आरोप पत्र के खिलाफ भी आक्रोश देखा गया। चिकित्साधिकारियों ने अपर मुख्य  सचिव की बैठक में अनुपस्थित रहने पर मृत एडिशनल मुख्य चिकित्साधिकारी जंगबहादुर को कोविड बार रूम में ड्यूटी लगाने के डीएम के आदेश पर भी नाराजगी जताई। कहा कि डॉक्टर जंग बहादुर दिनरात कर्तव्य कर रहे थे। अस्वस्थता के कारण बैठक में उपस्थित नहीं हो पाए थे। वे हृदय- रोगी थे। डीएम के इस आदेश से काफी दुखी भी थे। अंततः हृदय की बीमारी के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया जहां वे कोरोना पॉजिटिव निकले। 

शिकायत पर भी नहीं जागा बीएचयू प्रशासन 
बीएचयू परिसर में स्थित बीएचयू चैकी के पास कोरोना पॉजिटिव सुरक्षा कर्मियों को रखने के बारे में बीएचयू चैकी प्रभारी अमरेंद्र पांडेय ने लिखित रूप से बीएचयू प्रशासन को शिकायत किया था कि चैकी के पास ही कोरोना पॉजिटिव सुरक्षा गार्डों से संक्रमित होने का खतरा हो सकता है लेकिन उसपर कोई ध्यान नही दिया गया और खुद चैकी प्रभारी संक्रमित हो गए। इस मामले में इंस्पेक्टर लंका महेश पांडेय ने बताया कि चीफ प्रॉक्टर से बात किया गया था लेकिन जगह के अभाव का हवाला देते हुए उन्हें मना कर दिये। 

लापरवाही से बीएचयू में रोज हो रहे हंगामे
-हरिश्चंद्र कालेज के छात्रनेता कक्कू की मौत के बाद अस्पताल की दुव्र्यस्था को लेकर काफी हंगामा हुआ था ।
- रिटायर आयकर अधिकारी डॉ अनिल सिंह की मौत के बाद उनकी लाखों की अंगूठी और दो मोबाइल नही मिलने पर परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करने के बाद लंका थाने पर चोरी की तहरीर दिए
-जेल से आये कैदी की बिना निगेटिव रिपोर्ट आये ही डिस्चार्ज को लेकर हंगामा हुआ जिसके बाद बीएचयू प्रशासन ने कैदी के परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

अस्पताल में राम भरोसे मरीज 
कोरोना वायरस से पूरे देश में दहशत का माहौल बना है। एतियातन स्कूल-कॉलेजों और सिनेमा हॉल समेत तमाम तरह से कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गई है। अब डॉक्टर्स भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। लिहाजा अस्पताल के डॉक्टर भ्ज्ञी इलाज में लापरवाही बरत रहे है। इसस मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में इलाज कर रहे डॉक्टरों और कर्मियों की सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं है। जिस कारण परेशान डॉक्टरों और कर्मियों ने मरीजों के इलाज में लापरवाही बरत रहे है। डाक्टर मरीजों का इलाज सिर्फ दिखावा के तौर पर कर रहे है। मरीजों को छोड़ डॉक्टर विश्राम रूम में बैठकर समय काट रहे है। डॉक्टरों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर उनके लिए कुछ नहीं है। आलम यह है कि डॉक्टरों की अनदेखी से मरीज परेशान हैं। 

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