बिहार : जब सुषमा साहू फूट-फूटकर रोईं.. - Live Aaryaavart

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रविवार, 18 अक्तूबर 2020

बिहार : जब सुषमा साहू फूट-फूटकर रोईं..

sushma-sahu
पटना। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ने जा रही भाजपा की बागी नेता सुषमा साहू का नामांकन रद्द कर दिया गया है। नामांकन रद्द होने के बाद सुषमा साहू फूट-फूटकर रोईं। शनिवार को संवाददाता सम्मेलन कर उन्होंने कहा कि वह 14 अक्टूबर को नामांकन किया था। आज सेक्शन 364 का हवाला देकर नामांकन रद्द कर दिया गया, जबकि रिटर्निंग ऑफिसर के पास नामांकन स्वीकृत करने का अधिकार था। सुषमा साहू ने भाजपा के उम्मीदवार के साथ सत्ता के खिलाफ जमकर बरसा।  सुषमा साहू ने कहा कि एक बनिया की बेटी होने की सजा मिली है। बनिया को सिर्फ बंधुआ वोटर माना जाता है। अगर वह बड़े बाप की बेटी और पति होते तो आज उसका नामांकन रद्द नहीं होता। वह सत्ता में परिवर्तन की बयार लाने के लिए चुनाव लड़ने जा रही थी। बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग सत्ता में रहकर पांच साल तक जनता को मुहं नहीं दिखाते हैं। सिर्फ तगड़ा मैनेजमेंट कर दोबारा सत्ता में आ जाते हैं। सत्ता से लड़ने की सजा नामांकन रद्द कर दिया गया है। यही भाजपा में कार्यकर्ता का सम्मान नहीं होने की बात कही। 

उन्होंने कहा कि मैं कोई अपराध नहीं कर रही थी, चुनाव लड़ना सबके अधिकार क्षेत्र में होता है। रोते हुए कहा कि उसने भाजपा से इस्तीफा से दे दिया है। वह रुकेगी नहीं। आगे की रणनीति खुद बनाकर लड़ाई लड़ेगी और जीतेगी।  राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य और बिहार प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष सुषमा साहू के नामांकन रद्द हो गया है। बांकीपुर सीट पर चार चर्चित चेहरे ने नामांकन किया था। जिसमें विधायक नितिन नवीन, वैश्य समाज से आने वाली सुषमा साहू, ब्राहम्ण परिवार से आने वाली पुष्पम प्रिया और कांग्रेस के पैराशूट उम्मीवार अभिनेता शत्रुध्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा शामिल हैं, लेकिन अब उक्त सीट पर सुषमा साहू का नामांकन रद्द होने से तीन चर्चित चेहरे चुनाव मैदान में रह गए हैं। सुषमा ने भाजपा से बगावत कर बांकीपुर सीट पर भाजपा के सिटिंग विधायक नितिन नवीन के विरोध में निर्दलीय नामांकन किया था, इसे लेकर नितिन नवीन भी आशंकित थे।  बताते चलें सुषमा की पटना शहर और महिलाओं के बीच अच्छी पैठ मानी जाती है, जिसके कारण उनकी उम्मीदवारी से नितिन नवीन के साथ ही पूरी भाजपा आशंकित थी। सुषमा ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने का मन बनाया था और अनुभव की कमी के कारण दस्तावेजों में शपथपत्र भरना भूल गईं।  नामांकन रद्द होने की सूचना के बाद अभी भी सुषमा साहू का रो-रो कर बुरा हाल है तो दूसरी तरफ भाजपा खासकर नितिन नवीन ने राहत की सांस ली है। सुषमा साहू ने सिसकते प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वे सत्ता के खिलाफ लड़ रही हैं, जिसकी सजा उन्हें मिली है। उन्होंने कहा कि मैं एक ऐसे विधायक के खिलाफ चुनाव में थी जिसकी जनता उनसे आक्रोशित हो गयी है। वे अपने लोगों के बीच नहीं रहते हैं। उनको एक ऐसी महिला से दुश्मनी हो गई जिसके सर पर कोई नहीं है, पति भी नहीं। आगे कहा कि उनका नामांकन सिर्फ एक हलकी सी गलती की वजह से रद्द कर दिया गया है, जिसे सुधारा जा सकता था। रिटर्निंग अधिकारी को यह शक्ति प्राप्त है, लेकिन फिर भी मेरे साथ ऐसा किया गया क्योंकि मैं छोटे समाज, छोटे घर से आती हूं। उनलोगों को पता है कि मेरे साथ कितना बड़ा जनमत है।

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