बिहार : अर्थशास्त्री आद्री के सदस्य सचिव शैबाल गुप्ता का निधन - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 28 जनवरी 2021

बिहार : अर्थशास्त्री आद्री के सदस्य सचिव शैबाल गुप्ता का निधन

शैबाल गुप्ता के निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित राजनीति, समाजसेवा और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने अपना दुख प्रकट किया है और सोसाइटी को दिए उनके योगदान को याद किया है. ज्यादातर लोगों ने इसे व्यक्तिगत क्षति बताई है....

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पटना। जाने-माने-पहचाने अर्थशास्त्री आद्री के सदस्य सचिव शैबाल गुप्ता का निधन हो गया. वे 67 वर्ष के थे. दाह संस्कार कल गुलबी घाट पर होगा.निधन की खबर फैलते ही राज्य में गम पसर गया.शैबाल गुप्ता के निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित राजनीति, समाजसेवा और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने अपना दुख प्रकट किया है और सोसाइटी को दिए उनके योगदान को याद किया है. ज्यादातर लोगों ने इसे व्यक्तिगत क्षति बताई है. विख्यात अर्थशास्त्री और आद्री (एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीच्यूट) के सदस्य सचिव शैबाल गुप्ता का लंबी बीमारी के कारण आज निधन हो गया है. गुरुवार को पटना में उन्होंने शाम 7 बजकर 7 मिनट पर पारस अस्पताल में अंतिम सांस ली.वे 67 वर्ष के थे.पिछले कुछ दिनों से बुढ़ापे में आने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे. वे अपने पीछे पत्नी, बेटी, दामाद और नतिनी को छोड़ गए हैं. वे सभी लोग उनके अंतिम समय में उनके साथ ही थे.कल गुलबी घाट पर 2.30 बजे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा. डॉ गुप्ता 25 दिसंबर से पारस हॉस्पिटल में भर्ती थे.कल सुबह इनके पार्थिव शरीर को आद्री ऑफिस ले जाया जाएगा.अस्पताल से डेड बॉडी लाने के दौरान पत्नी और बेटी साथ थीं.डॉ गुप्ता के निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरा शोक जताया है. डॉ गुप्ता के निधन को बड़ी क्षति बताया है.पारस अस्पताल से डॉ शैबाल गुप्ता का पार्थिव शरीर गांधी मैदान स्थित आवास पर लाया गया. डॉ गुप्ता मूलत: बेगूसराय के रहने वाले थे, लेकिन तकरीबन 20 साल पहले उनका परिवार बेगूसराय छोड़ दिया. उनका जहां घर है, उस सड़क का नाम डॉ पी गुप्ता राेड है, जिसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने किया था.


डॉ गुप्ता बिहार सरकार के सलाहकार रहे हैं. बिहार की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, नीति आयोग और वित्त आयोग के लिए बिहार सरकार की ओर से रिपोर्ट बनाने में आद्री की प्रमुख भूमिका रही है.आर्थिक नीति और सार्वजनिक वित्त केंद्र (CEPPF) के निदेशक भी थे, जिसे बिहार सरकार द्वारा सार्वजनिक वित्त पर अनुसंधान के लिए समर्पित केंद्र के रूप में ADRI में स्थापित किया गया.डॉ. गुप्ता पिछले दो दशकों से अर्थशास्त्र और औद्योगिक अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अनुसंधान कर रहे थे.यह रिसर्च भारत में पूंजीवादी परिवर्तन के क्षेत्रीय आयामों और विकास के संबंधित प्रश्नों की राजनीतिक अर्थव्यवस्था में विशेषज्ञता रखता है.उनका अधिकांश काम भारत के सबसे अविकसित क्षेत्र बिहार में औद्योगिक क्षेत्र के विशेष संदर्भ में रहा है. डॉ. गुप्ता ने 'बिहार: ठहराव और विकास' नामक पुस्तक का संपादन भी किया था.उनका पत्रिकाओं में भी काफी योगदान रहा है और उन्होंने कई अखबारों के कॉलम लिखे हैं.उन्होंने बिहार में डायनामिक्स ऑफ एम्प्लॉयमेंट एंड पॉवर्टी, रोल ऑफ इंस्टीट्यूशनल क्रेडिट इन ट्राइबल डेवलपमेंट आदि सहित विभिन्न शोध रिपोर्ट तैयार की हैं. शैबाल गुप्ता के निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित राजनीति, समाजसेवा और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने अपना दुख प्रकट किया है और सोसाइटी को दिए उनके योगदान को याद किया है. ज्यादातर लोगों ने इसे व्यक्तिगत क्षति बताई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शैबाल गुप्ता के निधन पर कहा कि शैबाल गुप्ता जी से मेरा व्यक्तिगत संबंध था. उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी. कहा कि वे बिहार ही नहीं देश और दुनिया की कई महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थानों में प्रमुख भूमिका निभाने वालों में थे.उन्होंने बिहार में वित्त आयोग के सदस्य के साथ कई संस्थाओं को अपने अनुभवों से बड़ा लाभ पहुंचाया. बिहार के आर्थिक सुधारों में उनका महत्वपूर्ण था.उनके निधन से आर्थिक, समाजिक और राजनीतिक क्षेत्र को अपूरणीय क्षति है.मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा.


नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि मैं  प्रख्यात अकादमिक और सामाजिक वैज्ञानिक शैबाल गुप्ता जी के निधन पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. एडीआरआई हमें हमेशा सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में उनके योगदान के बारे में याद दिलाएगा, विशेष रूप से बिहार के बारे में. शैबाल गुप्ता के गुरु प्रो.नवल चौधरी ने कहा कि शैवाल गुप्ता का निधन ग्रेट लॉस है. वह मेरा बहुत प्यारा छात्र था. बहुत नजदीकी थी. परिवार के हिस्से की तरह था.मैंने उसे बीए में और फिर एमए में पढ़ाया.शुरुआती समय में और फिर विद्यार्थी जीवन में वह मेरे साथ रहा.आद्री के माध्यम से उसने बिहार की और समाज की बड़ी सेवा की.पढ़ाई-लिखाई की दुनिया को उसके नहीं रहने से बड़ा नुकसान हुआ है.वह मेधावी था, परिणाम की बहुत परवाह नहीं करता था.मुझसे जहां तक हो सका मैंने उसकी मदद की. राजनीति को वह बहुत अच्छी तरह से समझता था और जो काम ठान लेता था उसे कर लेता था.वह इंस्टीट्यूशन बिल्डर था.मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है.भगवान उसे शांति दे. पूर्व उपमुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि प्रतिवर्ष आम बजट से पहले वित्त विभाग की ओर से प्रकाशित होने वाली आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट डा. शैबाल गुप्ता और उनकी संस्था ‘आद्री’ के विशेषज्ञों द्वारा ही बिहार के विभिन्न आर्थिक व सामाजिक मानदंडों के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार की जाती थी. उनकी संस्था आद्री की अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान है.डा. गुप्ता की राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति थी.डा. गुप्ता की पहल पर ही वित्त आयोग को सर्वदलीय प्रतिवेदन देने की परम्परा शुरू हुई, जिसमें बिहार के विभिन्न मुद्दों को रेखांकित कर आयोग से धन की मांग की जाती थी. बिहार को विशेष राज्य का दर्जा क्यों चाहिए, इस पर भी डा. गुप्ता ने एक प्रमाणिक दस्तावेज तैयार किया था. इसके अलावा आईजीसी (इंटरनेशनल ग्रोथ सेंटर) की स्थापना कर डा. गुप्ता राष्ट्रीय, अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार आदि आयोजित करते रहे. जगजीवन राम शोध अध्य्यन संस्थान के निदेशक और लेखक श्रीकांत ने कहा कि शैबाल गुप्ता जब ए.एन. सिन्हा इंस्टीट्यूट में थे हमलोग तभी से उनको जानते हैं.उन्होंने आद्री को स्थापित कर दिखा दिया कि कोई उद्यमी लगनशील आदमी हो तो कैसे इंस्टीट्यूट को दुनिया भर में जानने लायक बना सकता है.उन्होंने बताया कि बिहार जैसे राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर का इंस्टीट्यूट खड़ा किया जा सकता है. उनका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है. पद्मश्री सुधा वर्गीज ने उन्हें याद करते हुए कहा कि शैवाल गुप्ता का नहीं रह जाना, बहुत ही दुखद खबर है. वे मुझे अक्सर कार्यकर्मों में बुलाते थे. शिक्षा और समाज से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने कई तरह के रिसर्च कराए.वे सोशल थिंकर थे.

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