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शुक्रवार, 19 मार्च 2021

पत्रकार नीतू सिंह को ‘चमेली देवी’ पुरस्कार

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नयी दिल्ली, 19 मार्च, ‘द मीडिया फाउंडेशन’ ने वर्ष 2020 के लिए उत्कुष्ट महिला पत्रकार की श्रेणी में ‘गांव कनेक्शन’ की वरिष्ठ संवाददाता नीतू सिंह को शुक्रवार को ‘चमेली देवी’ पुरस्कार दिया। फाउंडेशन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि लखनऊ निवासी हिंदी पत्रकार सिंह ने लैंगिक संवेदनशीलता से जुड़े मुद्दों और भेदभाव पर काफी ध्यान केंद्रित किया है। फाउंडेशन के प्रमुख हरीश खरे ने विज्ञप्ति में कहा कि सिंह को यह पुरस्कार यौन हिंसा से संबंधित 2020 में प्रकाशित उनकी खबरों के लिए दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन खबरों में दुष्कर्म पीड़िताओं की जिंदगी पर इस बर्बर कृत्य के प्रभाव पर आधारित सात भागों की एक समाचार श्रृंखला भी शामिल है, जिसका शीर्षक ‘बलात्कार के बाद’ है। खरे के मुताबिक, तीन सदस्यीय ज्यूरी ने सर्वसम्मति से सिंह का चयन किया और सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश के अंदरूनी इलाकों में रिपोर्टिंग के लिए उनकी प्रशंसा की। ज्यूरी ने कहा कि इन श्रृंखला में यौन हिंसा की शिकार पीड़िताओं की भयावह मानवीय कहानियों को बयां किया गया है। उन्होंने कहा, “ श्रृंखला में पीड़िताओं के सदमे को रेखांकित किया गया है और पीड़िताओं के परिवारों द्वारा सामाजिक-कानूनी मोर्चे पर पेश आ रही परेशानियों को बताया गया है। कुछ पीड़िताएं तो 12-13 साल की हैं।” सिंह ने यह समझने के लिए सात बलात्कार पीड़िताओं और उनके परिवारों से बातचीत की कि कैसे एक बर्बर कृत्य ने एक मासूम की दुनिया को ही बदल दिया। इन पीड़िताओं में अधिकतर नाबालिग हैं। एक वीडियो संदेश में सिंह ने कहा, “मैं हर लड़की से कहना चाहती हूं कि कभी भी किसी चीज़ को अपने सपनों के साकार होने में बाधा न बनने दें। अगर आप किसी काम को लगन से करेंगे तो आप निश्चित रूप से कामयाब होंगे।’’ इस साल की ज्यूरी में ‘बीएल इंक हिंदू बिज़नेस लाइन’ की संपादक बिशाखा डे सरकार, ‘भाषा-पीटीआई’ के संपादक निर्मल पाठक, स्क्रॉल डॉट इन’ के संपादक नरेश फर्नांडीस शामिल हैं। वार्षिक पुरस्कार के लिए पूरे देश से 39 प्रविष्टियां आई थी, जिनमें छह हिंदी में और एक तेलुगु में थी। यह पुरस्कार सामाजिक चिंताओं, समर्पण, साहस और करूणा को सम्मान देने के लिए दिया जाता है। फाउंडेशन ने चमेली देवी जैन के नाम पर 1980 में इस पुरस्कार की स्थापना की थी जो स्वतंत्रता सैनानी और समाज सुधारक थी और इन्हीं विश्वासों की वजह से उन्हें जेल भी जाना पड़ा। विज्ञप्ति में कहा गया है कि वार्षिक बीजी वर्गीज स्मृति व्याख्यान के बाद पुरस्कार दिया गया।







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