कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक द्वारा जलकुम्भी से तैयार किए जा रहे जैविक खाद एवं उसकी निर्माण तकनीक के संबंध में जानकारी दी गई। उन्होंने सुझाव दिया कि इस तकनीक को आत्मा द्वारा संचालित विभिन्न प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं अन्य किसानोन्मुखी कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों तक पहुँचाया जाए, ताकि जलकुम्भी जैसी समस्या को उपयोगी जैविक संसाधन में परिवर्तित किया जा सके। बैठक के दौरान उपस्थित प्रगतिशील किसानों से भी उनका मंतव्य एवं सुझाव लिया गया। किसानों द्वारा कृषि क्षेत्र में आ रही स्थानीय समस्याओं, नवीन तकनीकों एवं आत्मा के कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में अपने विचार साझा किए गए। प्राप्त सुझावों को किसान हित में आगामी कार्यक्रमों में शामिल करने पर भी चर्चा की गई। बैठक के अंत में जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक, आत्मा, श्री सुदामा ठाकुर द्वारा उपस्थित सभी पदाधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं प्रगतिशील किसानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा बैठक का समापन किया गया। बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी सह परियोजना निदेशक आत्मा श्री सुदामा ठाकुर, जिला मत्स्य पदाधिकारी, जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला गव्य पदाधिकारी, वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान, कृषि विज्ञान केन्द्र बसैठ,वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र, सुखेत,वैज्ञानिक धान अनुसंधान उपकेंद्र,एवं जिला के प्रगतिशील किसान आदि बैठक में उपस्थित रहे।
मधुबनी, 11 सितम्बर (रजनीश के झा) । आत्मा (कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण) द्वारा संयुक्त कृषि भवन, मधुबनी में दिनांक 11/09/2026 को आत्मा प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि विभाग के पदाधिकारियों, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों तथा आत्मा प्रबंधन समिति के सदस्यों ने भाग लिया। बैठक का शुभारंभ जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक, आत्मा, श्री सुदामा ठाकुर द्वारा उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं वैज्ञानिकों के स्वागत के साथ किया गया। तत्पश्चात उनके द्वारा वित्तीय वर्ष में आत्मा द्वारा किए गए विभिन्न क्रियाकलापों तथा आगामी प्रस्तावित कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी समिति के सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत की गई। उन्होंने आत्मा के माध्यम से कृषि तकनीकों एवं विभागीय कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुँचाने तथा किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने पर जोर दिया। बैठक में जिला मत्स्य पदाधिकारी द्वारा मखाना की खेती से जुड़े किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए बताया गया कि मखाना की हार्वेस्टिंग के पश्चात तालाबों में मछली पालन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के साथ-साथ किसानों की अतिरिक्त आय में वृद्धि की संभावना है।

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