हर सातवां अमरीकी गरीब. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

हर सातवां अमरीकी गरीब.

अमेरिका के बारे में चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. चमचमाते अमेरिका में हर सातवां आदमी गरीब. 2009 में गरीबी 10 फीसदी बढ़ गई. 4 करोड़ 30 लाख से भी ज्यादा लोग गरीब हैं. अमेरिकी अमेरिकी जनसंख्या का 14.3 फीसदी है.


अमेरिका के जनगणना कार्यालय ने जानकारी दी कि जनसंख्या का 14.3 फीसदी हिस्सा गरीब है. इसका मतलब अमेरिका में हर सातवें व्यक्ति के पास आवश्यक पैसे नहीं हैं कि वो अपना घर अच्छे से चला सके. 2008 में करीब चार करोड़ लोग गरीबी की रेखा से नीचे रह रहे थे लेकिन एक ही साल में ये संख्या रिकॉर्डतोड़ उछली. पिछले तीन साल से अमेरिका में गरीबों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है.

बढ़ती बेरोजगारी के कारण ऐसे लोगों की संख्या भी बढ़ गई है जिनके पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है. 2008 में बिना हेल्थ इंश्योरेंस वाले लोगों की संख्या 15.4 फीसदी थी जो 2009 में बढ़ कर 16.7 प्रतिशत हो गई. कुल मिला कर पांच करोड़ से भी ज्यादा लोगों के पास अमेरिका में हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है.

अधिकतर अमेरिकी नागरिकों को स्वास्थ्य बीमा कंपनियों में मिलता है और नौकरी से निकाले जाने के बाद निजी स्तर पर ये बीमा इतना महंगा है कि कोई करवाना चाहे भी तो नहीं करवा सकता. हालांकि कुछ बेरोजगार लोग अपने या अपने बच्चों के लिए सरकारी स्वास्थ्य सुरक्षा लेने में सफल होते हैं.

गरीबी रेखा के नीचे रहने का अमेरिका में मतलब है साल भर में चार लोगों के एक परिवार की कमाई 22 हजार डॉलर यानी करीब 10 लाख रुपये कम से कम होनी चाहिए हालांकि हर राज्य के हिसाब जीवन स्तर में भी फर्क पड़ता है. गरीबी का सबसे ज्यादा असर स्पेनी मूल के लोगों और अफ्रीकी लोगों पर पड़ा है इनमें से एक चौथाई निर्धन हैं. पिछले साल डेढ़ करोड़ से ज्यादा बच्चे गरीबी में रहने को मजबूर थे.

अमेरिका की तुलना में भारत में देखें तो प्रतिदिन दस रुपये से कम कमाने वाला व्यक्ति गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी में आता है. अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से विकासशील या गरीब देशों में प्रतिदिन एक डॉलर (करीब 45 रुपये) से कम कमाने वाला व्यक्ति गरीब माना जाता है.

भारतीय सरकार के मानकों के हिसाब से शहरी क्षेत्रों में 296 रुपये प्रति महीना और ग्रामीण इलाकों में 270 रुपये महीना की कमाई से कम गरीबी की श्रेणी में आती है.


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