जीवन के प्रति नकारात्मक द्रष्टिकोण से दूर रहो| जब हमारे चारों ओर प्रसन्नता है तो हम निक्रष्टता को क्यों देखें| दुनिया की सबसे महान कला,संगीत और साहित्य में भी कमियां देखी जा सकती है लेकिन क्या यह अधिक अच्छा नहीं होगा कि उनके यश और सुंदरता का आनंद लिया जाए|जीवन के अँधेरे और उजाले दो पक्ष होते हैं| प्रत्येक वस्तु में केवल अच्छाई देखो ताकि तुम सौंदर्य के गुण को आत्मसात कर सको|
(श्री परमहंस योगानंद)
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