बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को नालन्दा डेयरी परिसर में 135 करोड़ रुपये की लागत से बिहार का प्रथम पूर्णत: स्वचालित डेयरी एवं प्रथम टेट्रापैक प्लान्ट नालन्दा डेयरी बिहारशरीफ का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह प्लान्ट अत्याधुनिक है और अन्तर्राष्ट्रीय मानक के अनुरूप है।
उन्होंने कहा कि सत्ता संभालने के पूर्व बिहार में प्रतिदिन चार लाख लीटर दूध का उत्पादन होता था, जबकि आज 18 लाख लीटर दूध का प्रतिदिन संग्रहण हो रहा है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में हो रहे कामों की तारीफ करते हुए कहा कि वर्ष 2012-17 की अवधि के लिए राज्य सरकार ने डेयरी रोडमैप तैयार किया है, जिसके अन्तर्गत दुग्ध उत्पादन में वृद्घि, उसके संग्रहण एवं प्रोसेसिंग, संरक्षण एवं विपणन आदि सभी आयाम सम्मिलित हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गव्य विकास के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने का काम कर रही है। सरकार पशुपालन के साथ-साथ मत्स्यपालन पर भी ध्यान दे रही है। आने वाले समय में बिहार मछली उत्पादन में भी आत्मनिर्भर हो जाएगा।
आन्ध्रप्रदेश से मछली आयात होने के बजाए बिहार की मछलियां अन्य राज्यों में भेजी जाएंगी। उन्होंने देशी नस्ल की गाय को समाप्त नहीं होने की सलाह दी और कहा कि देशी नस्ल की गाय के बचाव के लिये सरकार अलग से सहयोग देने का काम करेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नालंदा में आयोजित पशु प्रदर्शनी में तीन पशुपालकों को 50 हजार, 35 हजार और 15 हजार रुपये का चेक देकर सम्मानित भी किया।

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