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बुधवार, 6 जनवरी 2021

बिहार : सबसे पहले विधायक संजीव ने वैक्सिन का ट्रायल किया

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पटना. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने ट्वीट कर कहा है कि दीघा विधायक डाॅ. संजीव चौरसिया ने कोरोना टीका लेकर समाज को जागृत करने में ठोस कदम उठाया है एवं इस पर अनर्गल बात करने वाले विपक्षी दलों पर करारा प्रहार किया है.डाॅ. चौरसिया प्रथम विधायक हैं,जिन्होंने न केवल कोरोना की जंग जीती,बल्कि कोरोना का टीका लेकर लोगों को नया संदेश भी दिया है. वहीं दीघा विधानसभा के विधायक डॉ.संजीव चौरसिया ने कहा है कि भारत बायोटेक के द्वारा निर्मित कोविड-19 वैक्सिन के ट्रायल में आज पटना एम्स में पूरे बिहार में सबसे पहले विधायक व जनप्रतिनिधि के रूप में मैंने वैक्सिन का ट्रायल किया. कोविड-19 वैक्सिन के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी और हमारे देश के महान वैज्ञानिकों को बहुत-बहुत साधुवाद. देश-दुनिया को प्रभावित करने वाले कोरोना वायरस (Coronavirus) से लड़ने के लिए कई देश वैक्सीन तैयार कर रहे हैं. लोग आशा भरी नजरों से वैक्सीन आने का इंतजार कर रहे हैं. वहीं, वैक्सीन में किस चीज का इस्तेमाल हुआ है? इसे लेकर भी देश-दुनिया में चर्चाएं जोरों पर है. वैक्सीन में सुअर की चर्बी और गाय का खून इस्तेमाल होने का शक किया जा रहा है. जिसके चलते वैक्सीन आने से पहले ही विवाद शुरू हो गया है.विवाद शुरू होने से पहले ही वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में कई तरह की शंकाए हैं. जिसके चलते लोग वैक्सीन के ट्रायल में लोग शामिल होने से कतरा रहे हैं. एक हफ्ते पहले तक दिल्ली एम्स में चल रहे भारत बायोटेक के कोविड-19 टीके के तीसरे चरण के ट्रायल के लिए पर्याप्त संख्या में वॉलंटियर नहीं मिल रहे थे. वहीं इससे उलट बिहार में कोरोना वैक्सीन के ट्रायल में शामिल होने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है.यहां पर 1250  वॉलंटियर ट्रायल दे दिये हैं.


कोरोना वैक्सीन का ट्रायल पटना एम्स (Patna AIIMS) में लगातार जारी है. ट्रायल में शामिल होने के लिए पटना एम्स जहां लोगों को जागरूक कर रहा है, वहीं लोग भी अब पटना एम्स में पहुंचकर वैक्सीन के ट्रायल (COVID-19 Vaccine) में शामिल हो रहे हैं. वैक्सीन लगवाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. एक दिन में लगभग 100 लोग तक कोविड-19 की वैक्सीन के ट्रायल का ट्रायल का हिस्सा बन रहे हैं. पटना एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग में कोविड-19 वैक्सीन के ट्रायल की व्यवस्था की गई है. यहां डॉक्टरों की एक टीम मौजूद रहती है, जो ट्रायल में शामिल होने वाले लोगों को एक-एक प्रोसेस से गुजराती है, उसके बाद उन्हें वैक्सीन दिया जाता है. सोमवार को भी पटना एम्स में बक्सर से 40, दानापुर के डीपीएस स्कूल से 35 और करीब 45 लोग अन्य स्कूल से वैक्सीन के ट्रायल में शामिल होने के लिए आए.  ट्रायल में हिस्सा लेने वाले एक व्यक्ति ने बताया, "हम पटना एम्स में वैक्सीन के ट्रायल में योगदान देने आए हैं. हमारे साथ दानापुर डीपीएस के 35 लोग शामिल हैं.आज हमारे साथ वैक्सीन के ट्रायल में लगभग 200 लोग शामिल हुए हैं." भारत बायोटेक के कोवैक्सिन नामक टीके के अंतिम चरण के ट्रायल के लिए निर्दिष्ट संस्थानों में से एक एम्स है. ट्रायल के लिए संस्थान को लगभग 1,500 लोग चाहिए. कोवैक्सिन का निर्माण, भारत बायोटेक और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा  है. एम्स में सामुदायिक चिकित्सा विभाग में प्रोफेसर और इस अध्ययन के प्रधान निरीक्षक डॉ. संजय राय ने कहा, ‘हमें 1500 से 2000 के लगभग लोग चाहिए थे, लेकिन अभी तक केवल 200 लोग आए हैं. लोग इस प्रक्रिया में यह सोचकर भाग नहीं ले रहे हैं कि जब टीका सबको मिलने वाला है तो ट्रायल में भाग लेने की क्या जरूरत है.’ उन्होंने कहा कि जब स्वेच्छा से आने वाले लोगों को प्रकिया के बारे में बताया जाता है तब वे इसमें भाग लेने से मना कर देते हैं.'

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