सुरेश खन्ना ने कहा कि 28 प्रतिशत वाले स्लैब की 90 प्रतिशत वस्तुएं अब 18 प्रतिशत पर और 12 प्रतिशत वाले स्लैब की 99 प्रतिशत वस्तुएं अब 5 प्रतिशत पर लाई गई हैं। रोज़मर्रा की वस्तुएं, रोटी, कपड़ा एवं मकान सहित कृषि उपकरण, दूध-पनीर जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स, कुछ दवाएं और स्टेशनरी पर जीरो से पांच प्रतिशत तक जीएसटी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि दरें घटने से मांग और खपत बढ़ेगी, जिससे उत्पादन में तेजी आएगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यही कदम प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएगा। उन्होंने ककहा, नई दरों से जीवन रक्षक दवाएं और सर्जिकल उपकरण सस्ते हो गए हैं। केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया संस्थान में कैंसर, ऑर्थो और ट्रॉमा सहित कई विभागों में 7 से 13 प्रतिशत तक कीमतें घटीं। कैंसर उपचार में प्रयुक्त एवेल्युमैब इंजेक्शन पर जीएसटी 12 फीसदी से शून्य, कीमत में ₹8,520 की कमी। स्तन कैंसर मरीजों के लिए फेस्गो 1200 मिग्रा इंजेक्शन पर 27,562 रुपये तक की बचत। दवाओं के सस्ते होने से मरीजों और तीमारदारों को सीधी राहत मिली।
आधारभूत ढांचे पर कर का सदुपयोग
सुरेश खन्ना ने बताया कि पिछले वर्ष टैक्स से 1.12 लाख करोड़ रुपये प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च हुए। इसके जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या 60 फीसदी बढ़ी, एयरपोर्ट 74 से बढ़कर 164, मेट्रो सेवा 248 किमी से बढ़कर 1093 किमी तक पहुंची। केंद्र सरकार 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन और करोड़ों को आवास उपलब्ध करा चुकी है। रक्षा उत्पादन में भी 34 गुना निर्यात वृद्धि दर्ज हुई है। उन्होंने कहा, जीएसटी 2.0 केवल टैक्स सुधार नहीं, बल्कि रोज़गार, स्वास्थ्य और विकास का समग्र पैकेज है, जिसका असर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा।

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