पटना : ग्रामीण आजीविका सुधार हेतु चार दिवसीय समेकित मत्स्य पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम समापन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 23 मार्च 2026

पटना : ग्रामीण आजीविका सुधार हेतु चार दिवसीय समेकित मत्स्य पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम समापन

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पटना (रजनीश के झा) 23 मार्च। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में मत्स्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा प्रायोजित “ग्रामीण आजीविका सुधार हेतु समेकित मत्स्य पालन की तकनीकियाँ” विषय पर आयोजित चार दिवसीय (20–23 मार्च, 2026) प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन 23 मार्च, 2026 को हुआ। इस प्रशिक्षण में अररिया जिले के 31 किसानों ने भाग लिया, जिन्हें समेकित मत्स्य पालन की उन्नत तकनीकों का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। समापन अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने किसानों को संबोधित करते हुए समेकित कृषि प्रणाली अपनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन के साथ बत्तख पालन को जोड़कर उत्पादन एवं आय को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने तालाब के किनारे आम, अमरूद, नींबू जैसे फलदार वृक्ष लगाने तथा तालाब के किनारे सेम, टमाटर जैसी सब्जियों की खेती करने की सलाह दी। उन्होंने कृषि के विभिन्न आयामों को अपनाने एवं जलवायु अनुकूल कृषि प्रणाली के माध्यम से किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने पर जोर दिया।


डॉ. कमल शर्मा, प्रभागाध्यक्ष, पशुधन एवं मात्स्यिकी प्रबंधन ने कहा कि समेकित मत्स्य पालन प्रणाली संसाधनों के समुचित उपयोग पर आधारित एक टिकाऊ एवं लाभकारी मॉडल है, जो किसानों को बहुआयामी आय के अवसर प्रदान करता है।डॉ. आशुतोष उपाध्याय, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग ने जल प्रबंधन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि तालाब प्रबंधन, वर्षा जल संचयन एवं जलवायु अनुकूल तकनीकों को अपनाकर उत्पादन एवं संसाधन संरक्षण दोनों सुनिश्चित किए जा सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों, तालाब प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, आहार प्रबंधन तथा समेकित कृषि प्रणाली के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं प्रक्षेत्र भ्रमण के माध्यम से तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव भी कराया गया, जिससे उनकी समझ एवं आत्मविश्वास में वृद्धि हुई। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण से उन्हें अपनी आजीविका सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। कार्यक्रम की सफलता में पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. सुरेन्द्र कुमार अहिरवाल, पाठ्यक्रम सह-निदेशक डॉ. बिश्वजीत देबनाथ, डॉ. तारकेश्वर कुमार, डॉ. विवेकानंद भारती एवं डॉ. राकेश कुमार सहित अन्य तकनीकी अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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