- गर्भवती महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति किया गया जागरूक।
- जच्चा-बच्चा के बेहतर स्वास्थ्य हेतु समुदाय आधारित गतिविधियों पर दिया जा रहा विशेष बल
गोदभराई दिवस का मुख्य उद्देश्य समुदाय स्तर पर गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिवारों में जच्चा-बच्चा के पोषण, स्वास्थ्य एवं देखभाल से संबंधित जागरूकता का व्यापक प्रचार-प्रसार करना है, जिससे कुपोषण में कमी लाई जा सके तथा सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिल सके। इस अवसर पर डॉ० ललिता कुमारी, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, आईसीडीएस, मधुबनी ने कहा कि स्वस्थ समाज की नींव स्वस्थ मां एवं स्वस्थ शिशु से ही मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि बच्चे के जीवन के प्रथम 1000 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, जिसकी शुरुआत गर्भधारण से ही हो जाती है। इस अवधि में माता एवं शिशु के समुचित विकास के लिए आवश्यक है कि गर्भवती महिलाओं की सभी पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति समय पर की जाए तथा नियमित टीकाकरण सुनिश्चित हो। उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को टी०एच०आर० (टेक होम राशन) की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक माह सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर ग्राम स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता दिवस का आयोजन कर स्वास्थ्य सेवाओं एवं पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है। जिले के विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों पर आयोजित कार्यक्रमों में सेविका, सहायिका, आशा कार्यकर्ता, एएनएम एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता देखी गई। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गर्भवती महिलाओं का सम्मान किया गया तथा उन्हें स्वस्थ मातृत्व के लिए प्रेरित किया गया। जिला प्रशासन एवं आईसीडीएस विभाग ने सभी गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिवारजनों से अपील की है कि वे नियमित रूप से आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़कर उपलब्ध स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं का लाभ उठाएं तथा सुरक्षित एवं स्वस्थ मातृत्व सुनिश्चित करने में सहयोग करें।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें