कर्ज में डूबी कंपनी को संकट से उबारकर मुनाफे में लाने वाले पंडित ने कंपनी को अब सरकारी निगरानी से भी निजात दिला दी है। वित्तीय संकट के दौरान कंपनी को 45 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता के बाद कंपनी पर यह निगरानी तय की गई थी। समूह ने शुक्रवार को अपने एक बयान में कहा कि पंडित ने इस साल भी एक डॉलर से ज्यादा वेतन नहीं लेने का फैसला किया है। समूह ने कहा कि उच्च पदस्थ 25 कर्मचारियों को भी शेयरों के रूप में वेतन देने का फैसला किया गया है।
पंडित का वेतन अगले साल बढ़ सकता है। सिटीग्रुप के चेयरमैन रिचर्ड पैर्सन ने कहा कि पंडित ने कंपनी को मुनाफे की स्थिति में पहुंचाया है यह सब उनके संपत्तियों को सहेजने और कंपनी की प्राथमिकताएं तय करने के प्रयासों के चलते हुआ है।
उन्होंने कहा, ''विक्रम का निर्णय प्रशंसनीय है लेकिन कंपनी का बोर्ड विक्रम को 2011 में सिटीग्रुप के सीईओ पद के अनुरूप वेतन देना चाहता है।''
सरकार की वित्तीय राहत योजना के अंतर्गत सिटीग्रुप को वर्ष 2008 और 2009 में सबसे ज्यादा वित्तीय मदद दी गई थी।
पंडित का वेतन अगले साल बढ़ सकता है। सिटीग्रुप के चेयरमैन रिचर्ड पैर्सन ने कहा कि पंडित ने कंपनी को मुनाफे की स्थिति में पहुंचाया है यह सब उनके संपत्तियों को सहेजने और कंपनी की प्राथमिकताएं तय करने के प्रयासों के चलते हुआ है।
उन्होंने कहा, ''विक्रम का निर्णय प्रशंसनीय है लेकिन कंपनी का बोर्ड विक्रम को 2011 में सिटीग्रुप के सीईओ पद के अनुरूप वेतन देना चाहता है।''
सरकार की वित्तीय राहत योजना के अंतर्गत सिटीग्रुप को वर्ष 2008 और 2009 में सबसे ज्यादा वित्तीय मदद दी गई थी।

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