भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पोलर स्टेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) सी-16 को बुधवार सुबह 10 बजकर 12 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से लॉन्च किया गया.
भारत ने अंतरिक्ष में एक बार फिर इतिहास रचा . इसमें सिंगापुर का पहला उपग्रह भी अंतरिक्ष में छोड़ा गया है. इसमें बाकी दो छोटे उपग्रहों का निर्माण भारत और रूस ने किया है.
इसरो के लॉन्च पैड से ध्रुवीय प्रक्षेपण यान PSLV C16 का पहला चरण सफल रहा. सिंगापुर का सूक्ष्म-उपग्रह एक्स-सैट 105 किलोग्राम का है. सिंगापुर के ननयांग तकनीकी विश्वविद्यालय (एनटीयू) में निर्मित एक्स-सैट 800 किलोमीटर की ऊंचाई पर तीन साल तक कक्षा में चक्कर लगाएगा और भू-क्षरण और पर्यावरणीय बदलावों के चित्र लेगा. यह एनटीयू और नेशनल यूनिवर्सिटी आफ सिंगापुर सेंटर को आंकड़ें भेजेगा जिनका इस्तेमाल रिमोट इमेजिंग, सेंसिंग तथा प्रोसेसिंग में किया जाएगा.
एक्स-सैट को प्रक्षेपित करने के लिए इस पर काम आज से नौ साल पहले ही शुरू हो गया था. हालांकि वर्ष 2007 और पिछले साल तकनीकि गड़बड़ी के कारणों से इसमें देर हो गई. एक्स सैट के प्रक्षेपण के बाद सिंगापुर दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में पहला ऐसा देश होगा जिसका स्थानीय स्तर पर डिजाइन और निर्मित उपग्रह अंतरिक्ष में मौजूद होगा.
इस रॉकेट के जरिए इसरो 3 उपग्रह भेजेगा, इन उपग्रहों का प्रक्षेपण भारत की तरक्की के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा. भारत में ही बने रिसोर्ससेट-2 के अलावा रूस और सिंगापुर की 2 छोटी सैटेलाइट अतंरिक्ष में भेजी जाएंगी. भारत पीएसएलवी की मदद से 3 सैटेलाइटों को अंतरिक्ष में भेजेगा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रवक्ता एस. सतीश ने बताया कि सभी तरह की प्रक्रिया निर्बाध तरीके से चल रही हैं. तरल प्रोपेलन्ट को भरने का चौथा चरण प्रगति में है. प्रक्षेपण के लिए मौसम सामान्य है. इस मिशन को प्रक्षेपण प्रमाणन बोर्ड से शनिवार को ही मंजूरी मिल चुकी है. मिशन के मुख्य उपग्रह 1,206 किलोग्राम वजनी रिसोर्ससैट-2 को इसरो ने विकसित किया है. यह आधुनिक रिमोट सेंसिंग उपग्रह है जिससे प्राकृतिक संसाधनों के अध्ययन और प्रबंधन में मदद मिलेगी.

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