भारतीय मछुआरों की मौत के लिए ज़िम्मेदार ठहराए गए इतालवी जहाज़ के दो सुरक्षाकर्मियों को केरल की पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. दोनों सुरक्षाकर्मियों को कोच्ची तट पर लाया गया जिसके बाद उन्हें कोल्लम पुलिस को सौंप दिया गया. कोल्लम में ही इस मामले में पहली एफ़आईआर दर्ज कराई गई थी.
कुछ दिन पहले कोच्ची के समुद्र तट पर एक इतालवी तेल टैंकर पर मौजूद दो सुरक्षाकर्मियों ने कथित रूप से भारतीय नौका पर मौजूद मछुआरों पर गोलीबारी की थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी. केरल के आईजीपी के पद्माकुमार ने पत्रकारों को बताया, "इस मामले की शुरुआती जांच में हमने दो इतालवी सुरक्षाकर्मियों की पहचान की जिन्हें अब हिरासत में ले लिया गया है. अब ये मामला कोल्लम पुलिस के हाथ में है. जहाज़ के कर्मचारी ने पूछताछ के दौरान हमारे साथ काफ़ी सहयोग किया." इस मामले को लेकर भारत ने इटली के समक्ष रोष व्यक्त किया था. जहां भारत का कहना है कि मारे गए दोनों लोग निर्दोष मछुआरे थे, उधर इटली भारत के आरोपों का विरोध कर रहा है और सुरक्षाकर्मियों का बचाव कर रहा है. इस मामले में बातचीत करने के लिए इटली की एक टीम रविवार को दिल्ली पहुंच गई है.
ख़बरों के मुताबिक़ इस टीम के सदस्य विदेश मंत्री एस एम कृष्णा से मिलेंगें, जिसके बाद वे कोच्ची के लिए रवाना होंगें. इससे पहले विदेश मंत्री एस एम कृष्णा कह चुके हैं कि इतालवी जहाज़ के कप्तान और सुरक्षाकर्मियों को आत्मसमर्पण करना होगा और जांच में सहयोग देना होगा. केरल के मुख्यमंत्री ऊमन चंडी ने भारतीय मछुआरों पर हुए प्रहार को बरबर्तापूर्ण हरकत बताया था और कहा था कि चूंकि ये हादसा भारत के अधिकार क्षेत्र में हुआ है, इसलिए भारतीय क़ानून प्रक्रिया का ही पालन किया जाएगा.
मुख्यमंत्री का कहना था कि इतालवी सुरक्षाकर्मियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. जबकि कुछ ख़बरों के मुताबिक इटली चाहता है कि इस मामले में संयुक्त राष्ट्र संधिपत्र के तहत इतालवी सुरक्षाकर्मियों के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाया जाना चाहिए. 25 वर्षीय आजेश बिनकी और 45 वर्षीय जलास्टीन पर इतालवी जहाज़ के सुरक्षाकर्मियों ने कथित तौर पर इसलिए गोली चलाई क्योंकि उन्हें लगा कि ये मछुआरे समुद्री लुटेरे हैं. सोमालिया और अदन की खाड़ी में जहाज़ों के अपहरण और समुद्री लुटेरों के हमले के बाद से हर जहाज़ में चालक दल के सदस्य अपने साथ बंदूकधारी भी रखने लगे हैं.

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