मुंबई 24 जून, ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर होने के फैसले से आज दुनिया भर के शेयर बाजारों में कोहराम मच गया। इसके दबाव में बीएसई और एनएसई के सूचकांक भी दो प्रतिशत से अधिक लुढ़क गये जिससे निवेशकों को पौने दो लाख करोड़ रुपये की चपत लगी। डॉलर की तुलना में रुपया भी एक प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क गया। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल पाँच प्रतिशत से अधिक की गिरावट में रहा। हालाँकि, सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना 1,205 रुपये चढ़कर घरेलू बाजार में सवा दो साल के उच्चतम स्तर 30,875 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुँच गया। ब्रिटेन में यूरोपीय संघ से अलग होने (ब्रेग्जिट) के मुद्दे पर गुरुवार को जनमत संग्रह हुआ था। शुक्रवार को मतगणना में यह स्पष्ट होने के बाद कि लोगों ने इसके पक्ष में मतदान किया है दुनिया भर के शेयर, मुद्रा तथा कच्चा तेल बाजारों में कोहराम मच गया। बीएसई का सेंसेक्स 634.74 अंक लुढ़ककर 26,367.48 अंक पर खुला। एक समय यह 1,090.89 अंक लुढ़ककर 25,911.33 अंक तक फिसल गया था। लेकिन, बाद में सरकार और रिजर्व बैंक (आरबीआई) के इस बयान से कि भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव काफी मजबूत है और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक बाजार में तरलता बनाये रखने के लिए डाॅलर तथा रुपया उपलब्ध कराने से नहीं हिचकिचायेगा, शेयर बाजार में धारणा सुधरी और सेंसेक्स 26,397.71 अंक पर बंद हाेने में सफल रहा।
एनएसई का निफ्टी 181.85 अंक टूटकर 26 मई के बाद 8,100 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 8,088.60 अंक पर बंद हुआ। वित्त मंत्रालय ने चीन की यात्रा पर गये वित्त मंत्री अरुण जेटली का एक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने कहा कि भारत ब्रेग्जिट के तात्कालिक और मध्यम अवधि के प्रभावों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। वृहद अर्थव्यवस्था की हमारी नींव मजबूत है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के रूप में हमारे तात्कालिक और मध्यावधि सुरक्षा कवच भी मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक पूरी तरह तैयार हैं तथा तात्कालिक उथल-पुथल से निपटने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत है, बाहरी उधारी कम है और विदेशी मुद्रा भंडार प्रर्याप्त है। इससे आने वाले दिनों में देश की आर्थिक स्थिति अच्छी रहनी चाहिये। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के रुख पर लगातार नजर रखे हुये है। पूँजी बाजार में व्यवस्था बनाये रखने के लिए डॉलर और रुपये की तरलता बनाये रखने समेत सभी जरूरी कदम उठाये जायेंगे। अपनी ब्रितानी इकाई जगुवार लैंड रोवर्स से राजस्व का एक बड़ा हिस्सा कमाने वाली टाटा मोटर्स ने सेंसेक्स में सबसे ज्यादा 7.99 प्रतिशत का नुकसान उठाया। एक समय उसके शेयर 11 प्रतिशत से ज्यादा उतर गये थे।
ब्रिटेन में घाटे में चल रहे इस्पात कारोबार को बेचने की प्रक्रिया में शामिल टाटा स्टील के शेयरों में 6.37 प्रतिशत की दूसरी सबसे बड़ी गिरावट रही। मजबूत डॉलर और शेयर बाजार की गिरावट के दबाव में रुपया भी 63 पैसे फिसलकर 67.88 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। शुरुआती कारोबार में ही 68.21 रुपये प्रति डॉलर तक लुढ़क गया। कारोबारियों ने बताया कि इसके बाद रिजर्व बैंक ने वाणिज्यिक बैंकों के जरिये डॉलर की बिकवाली शुरू की जिससे यह 68 रुपये प्रति डॉलर से ऊपर पहुँचने में सफल रहा। इसके बावजूद यह लगभग चार महीने के निचले स्तर पर बंद हुआ। डॉलर के मुकाबले पाउंड में अब तक की सबसे बड़ी 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह वर्ष 1985 के बाद के निचले स्तर पर आ गया। विदेशी शेयर बाजारों में जापान का निक्की 7.92, हांगकांग का हैंगसैंग 2.92, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.09 और चीन का शंघाई कंपोजिट 1.33 फीसदी लुढ़क गया। ब्रिटेन का एफटीएसई भी शुरुआती कारोबार में 4.79 प्रतिशत गिर गया।

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