समस्तीपुर: पिछले 20 सालों से ना तो कोई चिकित्सक है और ना ही कोई कर्मचारी - Live Aaryaavart

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बुधवार, 9 सितंबर 2020

समस्तीपुर: पिछले 20 सालों से ना तो कोई चिकित्सक है और ना ही कोई कर्मचारी

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समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर ज़िले के सिंधिया प्रखंड के ग्राम पंचायत बारी में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले 20 सालों से ना तो कोई चिकित्सक है और ना ही कोई कर्मचारी। पंचायत के लोग बताते हैं कि साल 2000 तक वहां चिकित्सक भी थे और कर्मचारी भी। लेकिन उसके बाद फिर कभी कोई नहीं आया। कोरोना वायरस से फैली महामारी की स्थिति में पंचायत के लोगों ने स्थानीय अधिकारियों से कई बार इसकी शिकायत की। हर बार जवाब मिलता है कि यहां कोई पदस्थापना ही नहीं है। बारी पंचायत के शुभम झा और शशिभूषण झा ने स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने की माँग करते हुए समस्तीपुर के डीएम को आवेदन भी दिया। मगर अब तक वहां डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी है। डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ़ नहीं होने की यह समस्या केवल समस्तीपुर के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की नहीं है। स्टेट हेल्थ सोसाइटी, बिहार के आँकडों की मानें तो राज्य के 534 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में से एक भी चालू हालत में नहीं है।



रेफ़रल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 466 है, मगर कार्यरत सिर्फ़ 67 हैं। ऐसा ही हाल अनुमंडल अस्पतालों और सदर अथवा ज़िला अस्पतालों का भी है। राज्य के 13 मेडिकल कॉलेजों में से भी केवल 10 ही फंक्शनल हैं। 2011 की जनगणना के हिसाब से देखें तो स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों की ज़रूरत लगभग दोगुनी ज़्यादा हैं। लेकिन यहां ज़रूरतों की बात करना भी बेमानी लगता है! जो केंद्र और अस्पताल पहले से हैं वे भी नहीं चल पा रहे हैं क्योंकि डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ़ की 60 फ़ीसद से भी अधिक कमी है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने इसी साल मार्च में विधानसभा के अंदर राजद के विधायक शिवचंद्र राम की तरफ़ से उठाए गए प्रश्न का जवाब देते हुए कहा था, "राज्य में चिकित्सा पदाधिकारी के कुल स्वीकृत पद 10609 हैं। जिसमें से 6437 पद रिक्त हैं।" यानी 61 प्रतिशत जगहें ख़ाली हैं। केवल डॉक्टर ही नहीं राज्य में मेडिकल स्टाफ़ और नर्सों की भी भारी कमी है। यहां स्टाफ़ नर्स ग्रेड के कुल स्वीकृत पद 14198 हैं, लेकिन कार्यरत बल महज़ 5068 है। एनएनएम नर्स के भी 10 हज़ार से अधिक पोस्ट ख़ाली हैं।

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