सीहोर : भाइयों को पहले संपत्ति का नहीं विपत्तियों का बंटवारा करना चाहिए : पं तिवारी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 18 दिसंबर 2024

सीहोर : भाइयों को पहले संपत्ति का नहीं विपत्तियों का बंटवारा करना चाहिए : पं तिवारी

  • रामजी के अनुरोध पर कैकई ने मांग था जनक से राम वनवास, रामचरण पादुकाऐं रखकर भरत ने किया था अयोध्या में राज

Ram-katha-sehore
सीहोर। संपत्ति के लिए लडऩे वाले भाईयों को रामचरित्र मानस की चौपाईयों से शिक्षा लेकर संपत्ति का नहीं विपत्तियों का बंटवारा परिवार की अंखड़ता के लिए करना चाहिए। रामजी और भरतजी ने संपत्ति को लेकर झगड़ा नही किया उन्होने विपत्तियों के बंटवारे के लिए प्रयास किया। रामजी के अनुरोध पर कैकई माता ने राजा दशरथ से राम वनवास मांग लिया और रामकाज के लिए कलंकित हो गई। आज कोई भी अपनी पुत्री का नाम कैकई नहीं रखता है किंतू राम के लिए माता कैकई हमेशा के लिए अमर हो गई। भरत जी ने अयोध्या का राजा बनने से इंकार कर दिया तब रामजी ने भरत के कहने पर चरण पादुकाओं का अवतार कर दिया। सिंहासन पर रामचरण पादुकाऐं रखकर भरत ने अयोध्या में राज किया उक्त उद़्गार सिंधी कालोनी में आयोजित श्रीराम कथा के पांचवे दिन बुधवार को कथा व्यास ज्योतिषाचार्य पंडित अजय शंकर तिवारी के द्वारा श्रद्धालुओं मध्य व्यक्त किए गए।

 

उन्होने कहा की जो व्यक्ति अपने मन रूपी दर्पण को गुरू के चरणारज से स्वच्छ कर लेगा वह भगवान के प्रेम को भी सरलता से प्राप्त कर लेगा। गुरू महीमा का वरण करते हुए उन्होने कहा की गुरू के मुख से निकलने वालीवाणी का पालन शिष्य का करना चाहिए भगवान श्री राम अपने गुरू ऋषि वशिष्ठ के निर्देशों का पालन करते है और धर्ममार्ग पर चलकर सभी का कल्याण करते है। राम विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा की अयोध्या में खुशियां मनाई जा रही थी प्रजा रामजी को राजा के रूप में देखना चाहती थी यह बात राजा दशरथ के पास भी गुप्तचरों ने पहुंचा दी थी। राजा दशरथ ने भरी सभा में दर्पण बुलवाया और अपनी वृद्धावस्था को जाना तब राजा दशरथ ने राम जो को अयोध्या का राजा बनाने का विचार ऋषि वशिष्ठ के समक्ष व्यक्त किया। राजा दशरथ ने कहा की प्रजा की इछा है की राम अयोध्या के राज बने प्रजा राम से प्रेम करती है तब ऋषि वशिष्ठ ने कहा था राम प्रेम की मूर्ति है राम के शत्रु भी उनसे प्रेम करते है राम शत्रुओं को भी आराम देते है। पंडित श्री तिवारी ने कहा की कथा आती है जब राम रावण युद्ध चल रहा था तब रावण युद्ध मैदान में थक गया था तब भगवान रामचंद्र जी ने रावण से कहा था की विश्राम कर लिजीए युद्ध कल लड़ लेंंगे, महल में जाकर रावण की आंखों में आंसू देखकर मंदोदरी को क्या बात हुई पूछा तो यह बात रावण ने कही उन्होने कहा की राम अपने शत्रुओं को भी विश्राम देते है।


रामचरित्र मानस में आता है की केवट ने गंगा पार लगाने केे लिए रामजी के पैर धोने के मांग की तब रामजी ने केवट को कुछ देना चाह लेकिन उनकेे पास कुछ नहीं था तब माता सीता ने अपने प्रभु के मन की बात जान ली और अपनी मुद्रीका केवट को देने लगी लेकिन केवट ने मुद्रिका लेने से इंकार करते हुए केवल आशिर्वाद हीं लिया। रामकाज के कारण केवट आज पूजित हो गए है। बुधवार को श्रीराम कथा श्रवण करने के लिए विधायक सुदेश राय की धर्मपत्नि श्रीमति अरूणा राय, नगर पालिका अध्यक्ष पिं्रस राठौर सहित शहर के अनेक गणमाननीय नागरिक एवं शहर सहित बाहर के श्रद्धालुगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। शिव शक्ति संस्कृतिक मंडल श्रीराम कथा आयोजन समिति द्वारा खाटुश्याम भजन सांध्या का आयोजन किया गया कार्यक्रम में भजन गायक  दीपाली यादव के द्वारा मधुर भजनों की प्रस्तुति दी गई आयोजन में मनोज शर्मा,रमेश आहूजा,सुदीप सम्राट,शंकरलाल शर्मा,बृजमोहन सोनी,श्रवण वास्तवार,नरेन्द्र राजपूत,संतोष वर्मा,मणिकांत जोशी,अमन वर्मा,मनोहर सिसोदिया,राजेन्द्र नागर,सीमा परिहार,प्रणय शर्मा,, दुश्यंत दासवानी श्यामबाई विश्वकर्मा, अभिलाष विश्वकर्मा, अमित वर्मा, अनिल, अरविन्द, हर्ष शर्मा, ममता शर्मा, पूनम राजपूत,सार्थक निखिल वर्मा अंकिला गोयल, ओपी शाक्य, रेखा वर्मा, हार्दिक वर्मा उपस्थित रहे

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