उन्होंने कहा कि सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि उसने राज्यों पर एमएसपी बोनस खत्म करने का दबाव डाला और उसने इसे बिना किसी तर्क के “राष्ट्रीय प्राथमिकताओं” के नाम पर सही ठहराया गया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा, "एक और गंभीर सवाल यह है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में “गैर व्यापारिक अवरोध" घटाने की बात कही गई है। क्या इसका मतलब एमएसपी और सरकारी खरीद को कमजोर करना है? सरकार इस सवाल से भी बच रही है।" उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार किसानों से किया वादा निभाना नहीं चाहती और वह ‘‘अपने स्वार्थ के लिए भारतीय कृषि को कुर्बान करने को भी तैयार’’ है। राहुल गांधी ने कहा, "हम किसानों के अधिकार और एमएसपी की रक्षा के लिए संसद के भीतर और बाहर आवाज उठाते रहेंगे।" रायबरेली से लोकसभा सदस्य राहुल गांधी ने 10 मार्च को लिखित प्रश्न किया था कि क्या सरकार ने 2021 में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों से वादा किया था कि वह सभी फसलों के लिए "सी2+50 प्रतिशत " की दर से विधिक गारंटीकृत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करने पर विचार करेगी?
इसके उत्तर में कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा, "प्रत्येक वर्ष, सरकार राज्य सरकारों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के सुझावों पर विचार करने के बाद कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर पूरे देश में 22 अधिदेशित कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करती है।" मंत्री ने यह भी कहा था कि वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में एमएसपी को उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना के स्तर पर रखने के लिए पूर्व-निर्धारित सिद्धांत की घोषणा की गई थी। उन्होंने, "इसी के अनुसार, सरकार ने वर्ष 2018-19 से उत्पादन की औसत लागत पर 50 प्रतिशत के न्यूनतम रिटर्न के साथ सभी अधिदेशित खरीफ, रबी और अन्य वाणिज्यिक फसलों के लिए एमएसपी में वृद्धि की थी, जिससे देश भर के किसान लाभान्वित हुए हैं।

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