- रिश्तों की आड़ में ठगी का जाल, एक्सीडेंट, बीमारी या अचानक जरूरत का बहाना...
- अपने ही नंबर से रिश्तेदारों को भेजे जा रहे मदद के संदेश, वाराणसी समेत पूर्वांचल में तेजी से बढ़ा साइबर फ्रॉड, जागरूकता ही बचाव
घटना यहीं खत्म नहीं हुई। इसके बाद दर्जनों लोगों के फोन आने लगे कि उसी नंबर से उन्हें भी सहायता राशि मांगने के संदेश मिले हैं। इस तरह के कई लोग इस साइबर ठगी के जाल का निशाना बन रहे हैं। जांच करने पर यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई एक-दो घटनाएं नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल में तेजी से फैल रहा साइबर अपराध का नया ट्रेंड बन चुका है। साइबर अपराधियों की इस चालाकी का सबसे बड़ा कारण यह है कि वे लोगों की भावनाओं और भरोसे का फायदा उठाते हैं। जब किसी परिचित के नंबर से ‘एक्सीडेंट हो गया है’, ‘अस्पताल में हूं’, ‘तुरंत पैसे चाहिए’ जैसे संदेश आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से लोग बिना ज्यादा सोचे मदद करने की कोशिश करते हैं। कई बार लोग जल्दबाजी में ऑनलाइन ट्रांसफर भी कर देते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की घटनाओं में अक्सर व्हाट्सऐप ओटीपी, संदिग्ध लिंक या फर्जी कॉल के जरिए अकाउंट पर कब्जा किया जाता है। कई बार अपराधी पहले किसी व्यक्ति की प्रोफाइल और संपर्क सूची की जानकारी हासिल कर लेते हैं और फिर उसी पहचान का उपयोग कर ठगी का प्रयास करते हैं। वाराणसी और पूर्वांचल में तेजी से बढ़ते ऐसे मामलों को देखते हुए प्रशासन और साइबर सेल ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी परिचित के नंबर से अचानक पैसे मांगने का संदेश आए, तो बिना पुष्टि किए किसी भी प्रकार का भुगतान न करें। सबसे पहले संबंधित व्यक्ति को सीधे फोन कर बात करें या वीडियो कॉल के जरिए सत्यता की जांच करें।
इसके अलावा साइबर सुरक्षा के कुछ बुनियादी उपाय अपनाना भी बेहद जरूरी है। व्हाट्सऐप में टू-स्टेप वेरिफिकेशन जरूर चालू रखें, किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और अपना ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। यदि इस तरह का कोई संदिग्ध संदेश या कॉल प्राप्त होता है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है या नजदीकी साइबर थाने में इसकी जानकारी दी जा सकती है। दरअसल डिजिटल युग में साइबर अपराध भी उतनी ही तेजी से विकसित हो रहे हैं जितनी तेजी से तकनीक आगे बढ़ रही है। ऐसे में केवल कानून और पुलिस व्यवस्था ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की जागरूकता भी बेहद जरूरी है। यदि लोग थोड़ी सतर्कता और समझदारी से काम लें, तो साइबर अपराधियों की यह चाल काफी हद तक नाकाम हो सकती है। पूर्वांचल में बढ़ते इस तरह के मामलों ने यह साफ कर दिया है कि साइबर अपराधी अब सीधे लोगों के बैंक खाते नहीं बल्कि उनके भरोसे और रिश्तों को निशाना बना रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि हम डिजिटल दुनिया में भी उतने ही सावधान रहें जितने वास्तविक जीवन में रहते हैं। याद रखें, कोई भी सच्चा परिचित यदि संकट में होगा तो वह केवल संदेश भेजकर पैसे नहीं मांगेगा। इसलिए किसी भी तरह के ‘इमरजेंसी मैसेज’ पर तुरंत भरोसा करने के बजाय पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें। यही सतर्कता आपको और आपके रिश्तों को साइबर ठगों के जाल से बचा सकती है।

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