सीहोर : हड़ताल पर आशा उषा कार्यंकर्ता करेंगी अब हल्ला बोल आंदोलन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 16 जून 2026

सीहोर : हड़ताल पर आशा उषा कार्यंकर्ता करेंगी अब हल्ला बोल आंदोलन

  • लंबित है अनेक मांगे, ना परमानेंट, ना अच्छी सैलरी, 24 घंटे काम, मातृ एवं शिशु टीकाकरण डिलीवरी अन्य काम ठप

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सीहोर। हड़ताल पर चल रही आशा उषा कार्यंकर्ता अब हल्ला बोल आंदोलन करेंगी। जिले भर की आशा उषा कार्यंकर्ता मंगलवार को टाउनहाल के पास एकात्रित हुई। इधर आशा उषा की हड़ताल से स्वास्थ्य विभाग के कार्य पर बहुत गहरा असर पड़ रहा है मातृ एवं शिशु टीकाकरण डिलीवरी अन्य काम ठप हो गए है। फूल नहीं चिंगारी है हम भारत की नारी के नारों के साथ आशा उषा कार्यंकर्ता ने लंबित है अनेक मांगों को लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार की। आशा उषा महिला संगठन प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा ठाकरे के निर्देश पर जिलाध्यक्ष सीमा चौहान ने आंदोलन का आहवान किया। आशा उषा महिला संगठन जिला कोषाध्यक्ष मीना राठौर ने मांगों का वाचन किया। जिला उपाध्यक्ष सरिता विश्वकर्मा ने पूर्व में सरकार के द्वारा किए गए वादों से आशा उषा कार्यंकर्ताओं को अवगत कराया।


आशा उषा महिला संगठन प्रवक्ता संगीता यादव ने कहा कि सरकार के दोगले रवैया से हम परेशान है आशा उषा कार्यंकर्ता विकट परिस्थितियों में भी 24 घंटे सरकार और जनता के लिए काम करती है। फिर भी सरकार आशा उषा कार्यंकर्ताओं को नियमित कर्मचारी नहीं मानती है अच्छी सैलरी भी नहीं देती है अनेक मांगे लंबित है लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है इस लिए हम हड़ताल करने पर विवश हुए है। हमारे द्वारा किए गए कई धरना प्रदर्शन ज्ञापन के बाद भी नियमितिकरण और वेतन बढोतरी नहीं की जा रही है। यही नहीं केंद्र सरकार प्रति वर्ष एक हजार रूपये सैलरी बढ़ाने के वादं को भी पूरा नहीं कर रही है। जिलाध्यक्ष सीमा चौहान नेराष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत ग्रामीण एवं शहरी आशा कार्यकर्ता को प्रोत्साहन नहीं दिया जा रहा है। जबकी मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु दर में कमी संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना टीकाकरण परिवार नियोजन कुपोषण नियंत्रण संक्रामक रोग रोकथाम तथा सरकार के द्वारा संचालित प्रत्येक राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान को सफल बनाने में आशा एवं उषा कार्यकर्तार्ओ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण एवं निर्णायक होती है। इस के बाद भी आशा उषा कार्यकर्ता न्यूनतम वेतन नियमित कारण मानदेय पेंशन ग्रेविटी सामाजिक सुरक्षा एवं सुरक्षित कार्य वातावरण जैसी बुनियादी अधिकार से वंचित है। 

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