पटना : कोइलवर प्रखंड में "खेत बचाओ अभियान" का सफल आयोजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 16 जून 2026

पटना : कोइलवर प्रखंड में "खेत बचाओ अभियान" का सफल आयोजन

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पटना (संवाददाता) । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना तथा कृषि विज्ञान केंद्र, भोजपुर के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 16 जून, 2026 को कोइलवर प्रखंड के कुल्हरजी एवं कुलहटिया गांवों में "खेत बचाओ अभियान" का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं को समझना, उन्हें वैज्ञानिक परामर्श प्रदान करना तथा सतत एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना था। अभियान के दौरान आईसीएआर-आरसीईआर, पटना के वैज्ञानिकों की टीम में डॉ. कमल शर्मा एवं डॉ. ए. डे शामिल थे, जबकि कृषि विज्ञान केंद्र, भोजपुर से उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह ने सक्रिय सहभागिता निभाई। वैज्ञानिकों ने कुल्हरजी गांव में 34 तथा कुलहटिया गांव में 51 किसानों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी कृषि संबंधी समस्याओं, चुनौतियों एवं आवश्यकताओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।


किसानों ने फसलों में बढ़ते कीट एवं रोग प्रकोप, कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। किसानों ने कृषि उत्पादन को प्रभावित करने वाली इन चुनौतियों के समाधान हेतु वैज्ञानिक एवं संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। वैज्ञानिकों ने किसानों को हरी खाद, वर्मीकम्पोस्ट एवं अन्य जैविक स्रोतों के अधिकाधिक उपयोग के लिए प्रेरित किया तथा यूरिया के अत्यधिक प्रयोग से बचने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन एवं जैविक संसाधनों के उपयोग से न केवल कृषि लागत में कमी आती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता एवं स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। इससे खेती अधिक टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल तथा लाभकारी बनती है। इस अवसर पर किसानों को आधुनिक कृषि नवाचारों, उन्नत तकनीकों तथा वैज्ञानिक खेती पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही यह आश्वासन दिया गया कि किसानों को कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से दिलाने के लिए बैंकों एवं संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे। "खेत बचाओ अभियान" किसानों की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझने, उनके समाधान हेतु वैज्ञानिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने तथा कृषि क्षेत्र में सतत, समावेशी एवं किसान-केंद्रित विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक पहल सिद्ध हुआ।

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