दिल्ली : रिशु श्री को मिली राहत, उच्च न्यायालय को जमानत याचिका पर निर्णय करने का निर्देश - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 16 जून 2026

दिल्ली : रिशु श्री को मिली राहत, उच्च न्यायालय को जमानत याचिका पर निर्णय करने का निर्देश

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नई दिल्ली/पटना । उच्चतम न्यायालय ने बिहार में सरकारी निविदाएं कुछ खास कंपनियों को दिलाने के लिए कमीशन लेने और बिचौलिये की भूमिका निभाने वाले ठेकेदार रिशु श्री को गिरफ्तारी से मंगलवार को चार हफ्ते के लिए राहत दे दी। रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री पर निविदा दिलाने के लिए कमीशन लेने और बिचौलिये के तौर पर काम करने का आरोप है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ठेकेदार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा की दलीलों पर गौर किया और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कहा कि वह अगले चार हफ्तों तक उसे गिरफ्तार न करे। प्रधान न्यायाधीश ने आदेश में कहा, ‘‘हम चार हफ्ते के लिए सुरक्षा देते हैं और (पटना) उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर करने की छूट देते हैं।  उच्च न्यायालय से अनुरोध है कि वह सुरक्षा की अवधि के दौरान ही जमानत याचिका पर फैसला करे।’’ हालांकि, पीठ ने उच्च न्यायालय के 18 मई के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें आरोपी की उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की याचिका खारिज कर दी गई थी। सुनवाई के दौरान, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी ने उच्च न्यायालय से जमानत नहीं मांगी, बल्कि ईडी द्वारा उसके खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द करने की मांग की। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘समस्या यह है कि आपने जमानत याचिका दायर नहीं की। आप वहां मामला रद्द करवाने के लिए गए थे। मामला (प्राथमिकी) रद्द करने के मामले में उच्च न्यायालय की कुछ सीमाएं हो सकती हैं, लेकिन जमानत देने के मामले में ऐसा नहीं है।’’ वकील मनोहर प्रताप के जरिये शीर्ष अदालत में दायर याचिका में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज बयानों के आगे उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

 

पटना उच्च न्यायालय ने 18 मई 2026 के अपने आदेश में रिशु श्री की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा कि ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) एक ‘‘आंतरिक दस्तावेज’’ है, न कि प्राथमिकी जैसा कोई कानूनी दस्तावेज। उच्च न्यायालय ने कहा था कि जांच के दौरान ईसीआईआर को आम तौर पर रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा था कि ईडी अधिकारी ‘‘पुलिस अधिकारी’’ नहीं हैं, इसलिए इकबालिया बयान से जुड़े दंड प्रक्रिया संहिता के सुरक्षा उपाय पीएमएलए की धारा 50 के तहत होने वाली कार्यवाही पर सख्ती से लागू नहीं होते। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी संजीव हंस के कथित सहयोगी रिशु श्री ने ईडी पर आरोप लगाया है कि वह एक ही तरह के तथ्यों और जांच से जुड़ी सामग्री के आधार पर कई समानांतर जांच शुरू करके अपने अधिकार क्षेत्र का लगातार विस्तार कर रही है। यह कानूनी लड़ाई उन कई जांच से जुड़ी हुई है, जिनकी शुरुआत 2023 में आईएएस अधिकारी संजीव हंस और बिहार के पूर्व विधायक गुलाब यादव के खिलाफ लगे आरोपों से संबंधित प्राथमिकी के साथ हुई थी।  हालांकि, शुरुआती जांच खास वित्तीय लेन-देन पर केंद्रित थी, लेकिन बाद में ईडी ने एक दूसरा मामला दर्ज किया। इसमें बिहार शहरी अवसंरचना विकास निगम और जल संसाधन विभाग समेत राज्य के कई विभागों में सरकारी निविदाओं में हेर-फेर से जुड़ी ‘‘बड़ी साजिश’’ का आरोप लगाया गया था। ईडी का आरोप है कि रिशु श्री ने बिचौलिये के तौर पर काम किया और कुछ खास कंपनियों को निविदा दिलाने के लिए कुल निविदा मूल्य का 5-7 प्रतिशत कमीशन लिया। एजेंसी का दावा है कि उसने 58 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 61 बैनामा (सेल डीड) और ऊंचे ओहदे वाले अधिकारियों के लिए प्रायोजित की गई विदेश यात्राओं की जानकारी हासिल की है।

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