दिल्ली : उच्च न्यायालय ने यूट्यूबर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 16 सितंबर 2026

दिल्ली : उच्च न्यायालय ने यूट्यूबर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा

ajit-bharti-bail-patition
नई दिल्ली । दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को यूट्यूबर अजीत भारती की उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के नगीना से लोकसभा सदस्य चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी करने के मामले में अपनी अग्रिम जमानत का अनुरोध किया था। न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने भारती, दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता आजाद के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि अदालत इस पर आदेश जारी करेगी। मामले की सुनवाई कर रही अदालत द्वारा सात सितंबर को इस मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार किए जाने के बाद भारती ने उच्च न्यायालय का रुख किया था। अधीनस्थ अदालत की कार्यवाही के दौरान, भारती के वकील ने दलील दी थी कि उन्होंने किसी जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था, बल्कि अपने परिवार के सदस्य के खिलाफ गंभीर उकसावे वाली बात पर जवाब दिया था। भीम आर्मी के प्रमुख आजाद ने दिल्ली पुलिस से की गई शिकायत में आरोप लगाया है कि भारती ने सोशल मीडिया पर उनके विरूद्ध और अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्यों एवं डॉ भीम राव आंबेडकर के खिलाफ जातिसूचक, अपमानजनक और नीचा दिखाने वाली टिप्पणी की। प्राथमिकी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। मामले की सुनवाई कर रही अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि उसके समक्ष मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया एससी/एसटी अधिनियम के तहत अपराध का मामला बनता है, जो आरोपी को अग्रिम जमानत देने से रोकता है।

कोई टिप्पणी नहीं: