विविधता में एकता हर हाल में बरकरार रखें : राष्ट्रपति

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पटना 17 अप्रैल, राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने ..कड़े संघर्ष और बड़े त्याग.. से मिली आजादी के बाद देश को एकजुट रखने की जरूरत पर बल देते हुए आह्वान किया विविधता में एकता भारत की बड़ी विशेषता है और इसे हर हाल में बरकरार रखना चाहिए । श्री मुखर्जी ने चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के मौके पर यहां श्रीकृष्ण स्मारक भवन में आयोजित अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में लोग अपने दैनिक कार्यों के लिये करीब दो सौ भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं और यहां सात प्रमुख धर्म है, बावजूद इसके लोग एक पहचान .. मैं भारतीय हूं .. , एक तिरंगा और एक संविधान के अंदर कार्य करते हैं । यह इस देश की खूबी है । भारत की इस विविधिता में एकता की सराहना होनी चाहिए और इसे हर हाल में बरकरार रखना चाहिए । राष्ट्रपति ने आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी और बिहार के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि चम्पारण आजादी की लड़ाई का प्रयोगशाला बना जहां से ..सत्याग्रह.. को पहचान मिली । उन्होंने कहा कि अफ्रीका से वकालत कर लौटे मोहनदास करमचंद गांधी का महात्मा गांधी में परिर्वतन बिहार के चम्पारण में ही हुआ था । श्री मुखर्जी ने कहा कि जीसस क्राइस्ट ने सदियों पहले विश्व को प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया था और उसी तरह महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा का संदेश दिया । उन्होंने पूरे विश्व को बताया कि शासन के अत्याचार का मुकाबला सत्य और अहिंसा के जरिये भी किया जा सकता है । उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में बिहार का लम्बा इतिहास रहा है । लोगों को अपना इतिहास नहीं भूलना चाहिए और अपनी जड़ों को जानना चाहिए । राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ क्योंकि जब देश को आजादी मिली उस समय वह दस-बारह वर्ष के ही थे लेकिन वह स्वतंत्रता सेनानी परिवार से है इसलिये वह आजादी की लड़ाई और संघर्षों से वाकिफ हैं । उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े सेनानियों को सम्मानित करने का उन्हें सौभाग्य मिला है । इस मौके पर बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने कहा कि चम्पारण की धरती ने ही मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी बना दिया । गांधी जी ने भी कहा था कि ..चम्पारण की धरती पर उन्हें ईश्वर, अहिंसा और सत्य का साक्षात्कार हुआ । इसी धरती ने उन्हें असली भारत का परिचय कराया.. । उन्होंने कहा कि यह सत्य है कि बिहार ने पूरे भारत का महात्मा गांधी से परिचय कराया था ।



इससे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि महात्मा गांधी ने देश की आजादी की लड़ाई को चम्पारण से ही नयी दिशा दी । आजादी की लड़ाई को उन्होंने यहीं जनांदोलन का स्वरूप दिया । इसके बाद उन्होंने अनेकों आंदोलन किये और चम्पारण यात्रा के 30 साल के बाद देश को आजादी दिला दी । उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की इसी चम्पारण यात्रा और उनके सत्याग्रह आंदोलन का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है । श्री कुमार ने कहा कि समाज में आज जो टकराव और असहिष्णुता का माहौल है उसमें गांधी जी के विचार आज भी प्रासंगिक है । चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के मौके पर 10 अप्रैल को यहां राष्ट्रीय विमर्श आयोजित किया गया था जिसमें गांधीवादियों से कहा गया कि वे देश के लिये नयी रूप रेखा तय करें । इस पर विमर्श के दौरान कई लोगों ने अपने विचार रखे हैं । इन विचारों को संकलित कर पुस्तक के तौर पर प्रकाशित किया जायेगा । मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी को चम्पारण बुलाने वाले राजकुमार शुक्ला के गांव में 27 अप्रैल को सरकार की ओर से कार्यक्रम आयोजित है जिसमें वह भी हिस्सा लेंगे । इसके अलावा भी अन्य कार्यक्रम शताब्दी वर्ष में होना है । उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया था लेकिन कुछ लोग आये और कुछ नहीं । जो नहीं आये उनकी मर्जी । गांधी जी ने भी कहा था कि जो उनसे सहमत हैं तो अच्छा है और जो नहीं है उनके प्रति भी कोई घृणा नहीं है । श्री कुमार ने कहा कि श्री राजनाथ सिंह को केन्द्रीय गृह मंत्री और केन्द्र सरकार के सबसे वरिष्ठ मंत्री के नाते आज के कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था । उन्होंने इस कार्यक्रम में आने के लिये सहमति भी दे दी थी लेकिन न जाने क्यों अंतिम समय में उन्होंने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया । हालांकि इसके बावजूद उन्हें उनसे कोई शिकायत नहीं है । मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है । स्वतंत्रता सेनानियों ने संघर्ष नहीं किया होता तो देश को आजादी नहीं मिलती और देश में लोकतांत्रिक सरकारें नहीं बनती । उन्होंने कहा कि सरकार का यह दायित्व है कि वह सेनानियों का सम्मान करें और वह ऐसा नहीं करती है तो इसका अर्थ है कि वह अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक नहीं है । श्री कुमार ने कहा कि इस देश में बापू का नाम लेने वाले तो बहुत लोग हैं लेकिन उनके विचारों को मानने वाले नाम मात्र के लोग ही बच गये हैं । उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बापू के विचारों को जन जन तक पहुंचाना चाहती है और इसी के तहत हर दरवाजे पर दस्तक देकर ..बापू आपके द्वार.. के जरिये उनके विचारों को पहुंचायेगी । इसके साथ ही सभी विद्यालयों में बापू से जुड़ी कहानियां सुनायी जायेगी ताकि बच्चे उनके जीवन से परिचित हों । मुख्यमंत्री ने कहा कि बापू ने भी कहा था कि उनका जीवन ही संदेश है । ऐसे में यदि नयी पीढ़ी बापू के जीवन से परिचित होंगी और दस से पन्द्रह प्रतिशत लोग भी उनके विचारों को ग्रहण कर लेंगे तो अगले दस-पन्द्रह वर्ष में बदलाव आ जायेगा और लोगों को आज के माहौल से छुटकारा मिल जायेगा । मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ विकास की बात हो रही लेकिन इसके लिये सही माहौल बनाना जरूरी है । उन्होंने कहा कि बापू के विचारों पर आधारित शिक्षा और उनसे जुड़े स्थलों को सरकार पुनर्जीवित करेगी । उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने शराबबंदी कर सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद डाल दी है और अब बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ भी आंदोलन शुरू किया जा रहा है ।


राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा कि एक तरफ गांधी के हत्यारे गोड्से को समर्थन करना और दूसरी ओर राष्ट्रपिता माला पहनाना यह ढकोसला नहीं चलेगा । आज देश को धर्म और कट्टरपंथ के नाम पर अलग दिशा में ले जाने की कोशिश हो रही है । ऐसे में स्वतंत्रता सेनानियों को आगे आकर मार्गदर्शन करना चाहिए । उन्होंने कहा कि अमर सेनानी वीर कुंवर सिंह ने 80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिये थे । श्री यादव ने कहा कि भारत सभी धर्मों का देश है । हिंदू-मुस्लिम के नाम पर देश को बांटा जा रहा है। राम-रहीम के रूप में नफरत फैलायी जा रही है। लोग एक-दूसरे को लड़ाने में लगे हुए हैं। देश में जो आडंबर चल रहा है, वह नहीं चलने देंगे। उन्होंने कहा कि सभी को पता है कि किस परिस्थिति में बिहार में महागठबंधन बना । देश में गांधी जी के विचारों को दरकिनार किया जा रहा था और ऐसे में गांधी के देश को बचाने के लिए बिहार में महागठबंधन बना । राजद प्रमुख ने कहा कि आज आरक्षण खत्म करने और संविधान को बदलने की साजिश रची जा रही है । आज तीन तलाक की बात छेड़कर मूल समस्या से लोगों का ध्यान बंटाने की कोशिश हो रही है । उन्होंने कहा कि अमरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को जब गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया था तब उन्होंने कहा था कि मजहब के आधार पर भेदभाव ठीक नहीं है । यहां से जाने के बाद उन्होंने बयान दिया कि भारत में असहिष्णुता है । श्री यादव ने कहा कि गांधी जी ने जो देश को संदेश दिया, उसे आज लोग भूल चुके हैं। यदि आज गांधी होते तो वह लज्जित होते। उन्होंने कार्यक्रम में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नहीं आने पर तंज कसते हुए कहा ..राजनाथ को पता था कि मंच पर राहुल गांधी और लालू प्रसाद मौजूद रहेंगे, इसलिए वह नहीं आये.. । उनके नहीं आने की वजह से मंच से नाम काटना पड़ा और कुर्सी हटानी पड़ी । कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि कोई जरूरी नहीं है कि जिसके पास सत्ता हो, उसमें सच्चाई हो । सत्ता और सच्चाई में फर्क हो सकता है । उन्होंने कहा कि लोग सोचते हैं कि सत्ता में हैं इसलिए उसकी बात में सच्चाई होगी लेकिन यह सोच सही नहीं है । कई बार सत्ता होती है लेकिन सच्चाई नहीं । श्री गांधी ने कहा कि अंग्रेजों के पास सत्ता थी और लोगों को डराकर भी रखा था लेकिन उनके पास आत्मविश्वास नहीं था । तब गांधी जी ने देश की जनता से कहा था कि अंग्रेजों के पास सत्ता है लेकिन सत्य नहीं । सत्य जनता के पास है इसलिए जीत पक्की होगी । कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि जिसके हाथ में सत्ता है वह नफरत फैलाने की कोशिश करता है और डराने की कोशिश भी करेगा लेकिन देश की जनता उनकी बात मानने को तैयार नहीं है । इसलिए देश में नफरत फैलाने वाले कभी सफल नहीं होंगे । उन्होंने कहा कि हिन्दू-हिन्दू का शोर करने वालों को ये पता नहीं है कि हिन्दू का मतलब सच्चाई की रक्षा करना है। उसके हर धर्म ग्रंथ में लिखा है हर किसी का आदर करें, सत्य बोलें और अन्याय तथा असत्य के खिलाफ लड़ें। श्री गांधी ने कहा कि भारत ने 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ पहली लड़ाई लड़ी, इस लड़ाई में हिंदू, मुसलमान, सिख सभी एक साथ खड़े थे । उन्होंने कहा कि तिरंगा सिर्फ कपड़े का टुकड़ा नहीं है यह रिश्ता, भाईचारा और प्यार का प्रतीक है । यदि हम आपस में लड़ते रहेंगे तब तिरंगा नहीं लहरायेगा । समारोह में राष्ट्रपति ने देश भर से आये 15 स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया । इसके अलावा बिहार सरकार  की ओर से एक हजार से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया गया। समारोह में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी भी उपस्थित थे ।
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