सेना प्रमुख के बयान पर विवाद

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नयी दिल्ली,29 मई, सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के कश्मीर में पत्थरबाजों से निबटने के लिए मानव ढ़ाल का इस्तेमाल करने को सही ठहराने और ऐसे हालात मे नए तरीके ईजाद करने संबंधी बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ‘माकपा’के नेता मोहम्मद सलीम ने जनरल रावत के बयान को सेना में नैतिक मूल्यों का क्षरण बताया हैजबकि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि आतंकवाद से निबटने के लिए सेना को खुली छूट मिलनी चाहिए। श्री सलीम ने आज एक टीवी चैनल से कहा कि वह सेना प्रमुख के बयान से इत्तेफाक नहीं रखते। उन्होंने कहा कि यह उस भारतीय सेना की आवाज और सोच नहीं हो सकती जिसे वह बचपन से देखते आए हैं। एक भारतीय होने के नाते वह ऐसी बातों का कतई समर्थन नहीं कर सकते जो जनरल रावत ने कही है। माकपा नेता ने कहा कि जनरल रावत आतंकवाद से निबटने के लिए नए तरीके इजाद करने की जो बात कर रहे हैं तो ‘मैं उनसे यह कहना चाहूंगा कि भारतीय सेना में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है फिर ये नए तरीके इजाद करने का क्या मसला है। मुझे जनरल रावत की इस बात से भारतीय समाज की क्षमता को समझने की उनकी सोच पर संदेह होता है।’ इस बीच केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने जनरल रावत के बयान का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि अगर कोई सैनिकों पर पत्थर मारे तो क्या उन्हें चुपचाप खड़ा रहना चाहिए। ऐसी स्थितियों से निबटने के बारे में सेना प्रमुख ने जो बयान दिया है वह उससे पूरी तरह सहमत हैं। कांग्रेस नेता पीएल पूनिया ने भी इस मसले पर सेना प्रमुख का समर्थन करते हुए कहा कि आतंकवाद से निबटने के लिए सेना को खुली छूट मिलनी चाहिए इसमें किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। जनरल रावत ने कल एक साक्षात्कार में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद से निबटने के लिए पत्थरबाज को मानवीय ढ़ाल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का बचाव करते हुए कहा था कि जम्मू कश्मीर में जो ‘घृणित’ युद्ध चल रहा है उसके लिए सेना को नए तरीके इस्तेमाल करने होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पत्थरबाज को ढ़ाल की तौर पर इस्तेमाल करने वाले सैनिक अधिकारी मेजर गोगोई को इसलिए सम्मानित किया गया क्योंकि बेहद मुश्किल हालात में काम कर रहे युवा सैन्य अधिकारियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए ऐसा करना जरुरी था। उन्होंने कश्मीर में आतंकवाद से निबटने के बारे में सख्त संदेश देते हुए कहा कि वह सेैनिकों को पत्थरबाजों के हाथों मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। पत्थरबाज यदि गोलियां चलाते तो उनका जवाब उसी तरीके से दिया जा सकता था लेकिन वह जाे कर रहे हैं उससे निबटने के लिए नए तरीकों का इस्तेमाल अब जरुरी हो गया है।

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