कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा, रेल संरक्षा में सहयोग के करार किये भारत जर्मनी ने

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बर्लिन, 30 मई, भारत ने जर्मनी के साथ डिजिटलीकरण, कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा, स्वास्थ्य, शहरी विकास एवं रेल संरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग केे करीब एक दर्जन समझौतों पर आज यहां हस्ताक्षर किये, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की सह अध्यक्षता में यहां भारत जर्मनी अंतर सरकारी परामर्श के बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये। इस मौक पर श्री मोदी ने अपने प्रेस वक्तव्य में कहा कि भारत एवं जर्मनी के बीच तकनीकी नवान्वेषण एवं लोकतंत्र का एक-दूसरे के लिये पूरक संबंध है। जर्मनी की विशेषता इंजीनियरिंग, विनिर्माण एवं कौशल विकास के लिये पेशेवराना शिक्षा है जबकि भारत में 125 करोड़ से अधिक की विशाल आबादी है। श्री मोदी ने कहा कि आज की तारीख में दुनिया नवान्वेषण के बिना आगे नहीं बढ़ सकती है। भारत एवं जर्मनी का साथ नवान्वेषण और आबादी के विकास की आकांक्षाओं का मेल है। हमारे आर्थिक संबंध और तकनीकी सहयोग अगली पीढ़ी के उज्जवल भविष्य लिये बहुत ही आवश्यक हैं। जर्मनी भारत के विश्वस्त साझीदार के रूप में उभरा है। हम उस मैकेनिज़्म को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, “जर्मनी की उच्च तकनीक में कुशलता और भारत की मितव्ययी इंजीनियरिंग की जुगलबंदी विश्व को बहुत कुछ दे सकती है।” गौरतलब है कि जर्मनी में भारत के 13740 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। इंजीनियरिंग एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिये जर्मनी को विश्व का अग्रणी देश माना जाता है। दोनों नेताओं ने आतंकवाद से मुकाबले के लिये साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। श्री मोदी ने कहा, “हम हर प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ मजबूत और एकजुट कार्रवाई चाहते हैं। साइबर सुरक्षा और विमानन सुरक्षा में भी हम सहयोग मजबूत करेंगे।” दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने को लेकर जिन करारों पर हस्ताक्षर किये गये हैं, उनमें व्यावसायिक शिक्षा, मशीनी उपकरण संबंधी कौशल विकास, स्वास्थ्य क्षेत्र, वैकल्पिक औषधि, विदेश सेवा संस्थानों में सहयोग, रेलवे संरक्षा, साइबर सुरक्षा, सतत शहरी विकास, भारत जर्मन विकास सहयोग, जूनियर कारपोरेट अधिकारियों के प्रशिक्षण तथा डिजिटलीकरण, सशक्तीकरण एवं आर्थिक प्रभाव के क्षेत्र में करीब दस क्षेत्रों में सहयोग के करार शामिल हैं। बाद में सवाल जवाब के सत्र में श्री मोदी ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत की सोच को स्पष्ट किया। उन्हाेंने कहा कि पर्यावरण को लेकर हमारे पूर्वजों ने हमें चिंता करना सिखाया है। हमारी भावी पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का हमें कोई हक नहीं है। नैतिक रूप से यह एक अापराधिक कृत्य है। जब तक यह सोच स्वीकार नहीं की जाती, तब तक पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को ठीक से समझा नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने 175 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यूरोपीय संघ (ईयू) को लेकर सवाल के जवाब में श्री मोदी ने कहा कि भारत की सोच ईयू की एकता, सक्रियता के लिये है और वह इसके लिये अपनी ओर से सकारात्मक योगदान के लिये तैयार है। भारत ईयू के साथ मज़बूत और सक्रिय सहयोग करना चाहता है।

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