भारत का जाधव की सजा पर तत्काल रोक का आग्रह

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हेग/ नयी दिल्ली 15 मई, भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में सुनवाई पूरी होने से पहले पाकिस्तान द्वारा भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को फांसी दी जाने की आशंका जताते हुए आज अदालत से जाधव की सजा पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया। जाने-माने अधिवक्ता एवं पूर्व सॉलिसीटर जनरल हरीश साल्वे ने यहां स्थित पीस पैलेस के ग्रेट हॉल ऑफ जस्टिस में हो रही इस कार्यवाही में भारत का पक्ष रखते हुए कहा “इस न्यायालय में मामले की सुनवाई पूरी होने तक कुलभूषण को फांसी नहीं दी जा सकती। अन्यथा यह वियना संधि का उल्लंघन होगा।” उन्होंने कहा कि श्री जाधव के मामले में वियना संधि में राजनयिक संपर्क के प्रावधान वाले अनुच्छेद 36 का उल्लंघन किया गया है। श्री साल्वे ने कहा कि पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा कुलभूषण जाधव को फांसी की सज़ा सुनाया जाना वियना संधि के अनुच्छेद 36 के तहत अधिकारों का उल्लंघन है। श्री जाधव को बिना राजनयिक संपर्क का मौका दिए गिरफ्तार कर रखा गया है और अब उन पर फांसी की तलवार लटक रही है। उन्होंने आशंका जाहिर की कि यह अदालत सज़ा पर रोक नहीं लगाती है तो पाकिस्तान इसी तरह पर्दे के पीछे श्री जाधव को फांसी भी दे सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से कहा कि ऐसे सभी आवश्यक कदम उठाए जायें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पाकिस्तान इस याचिका का निपटारा होने तक श्री जाधव को फांसी नहीं दे। श्री जाधव की फांसी पर रोक के लिये उन्होंने दलील दी कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की नियमावली में अनुच्छेद 74 के अंतर्गत किसी देश को दिये गये अंतरिम निर्देश बाध्यकारी होते हैं और सभी देशों को उसे मानना होता है। विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं भारत के अधिवक्ता दल का नेतृत्व कर रहे दीपक मित्तल ने कहा “जाधव को उचित कानूनी सहायता हासिल करने और राजनयिक संपर्क का अधिकार भी नहीं दिया गया। आशंका है कि इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का आदेश आने से पहले ही उन्हें फांसी दे दी जाएगी।” पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने 46 वर्षीय श्री जाधव पर जासूसी का आरोप लगाकर उन्हें मौत की सजा सुनाई है। भारत ने स्थिति को गंभीर बताते हुए मामले की तुरंत सुनवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। 
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