राजगीर पुलिस और नालंदा प्रशासन से मुकेश भारतीय के इन सबालों का जबाव दिलवाईये सुशासन बाबू

mukesh-bhartiy
विधि व्यवस्था और सुशासन कायम रखने के लिये पुलिस प्रशासन के IPC और CRPC  के तहत आपात अधिकार दिये गये हैं। इसका अर्थ यह नहीं हैं कि उसके नुमाईंदे जो चाहें और जब चाहें वे कर लें। आज एक शुभचिंतक ने राजनामा.कॉम के संचालक-संपादक मुकेश भारतीय पर राजगीर थाना में में एक कथित पत्रकार, जो राजगीर मलमास मेले की सैराती जमीन पर अतिक्रमण करने वाले एक भू-माफिया के रुप में चिन्हित हो चुका है, के बेतुका बयान के आधार पर की गई एफआईआ की कॉपी भेजी है। हालांकि, इस मामले में फेसबुक पर उस कथित(फर्जी) पत्रकार की एक पोस्ट पर मुकेश भारतीय ने आपत्ति नालंदा के डीएम और एसपी समेत राज्य के मुखिया नीतिश कुमार को भेज चुकें हैं। राजनामा.कॉम पर शिवनंदन नामक कथित फर्जी पत्रकार के बारे में तत्थात्मक खबरें प्रसारित की गई थी। उस खबर से जुड़े हर तत्थ के प्रमाण हमारी टीम के पास उपलब्ध हैं। शिवनंदन नामक कथित फर्जी पत्रकार ने मुकेश भारतीय को खबर प्रसारित होने के बाद फोन किया था। जिसका ऑडियो रिकार्ड से स्पष्ट है कि शिवनंदन ने थाना में बैठ कर तरह-तरह की धमकियां दी। उसमें यह बात भी शामिल है कि वह झूठा मुकदमा करने जा रहा है। लेकिन ऐसी धमकियां एक साइट संचालक और संपादक के लिये रोजमर्रा की बात है। यह मान श्री भारतीय ने सारी बातों को अनदेखा कर दिया। लेकिन उसके एक दिन बाद नालंदा से एक शुभचिंतक ने कथित फर्जी पत्रकार शिवनंदन द्वारा अपने फेसबुक वाल पर की गई एक पोस्ट का स्नैपशॉट भेजा। उस पोस्ट से यह स्पष्ट होता है

उस समय मुकेश भारतीय ने राजगीर थाना प्रभारी से भी बात की थी। उन्होंने कंप्लेन मिलने की बात तो की लेकिन, उसमें क्या लिखा गया है, उसकी जानकारी नहीं दी। लेकिन आज जो एफआईआर की कॉपी राजनामा.कॉम के शुभचिंतक ने भेजी है, वह हैरान कर देने वाली है। एफआईआर में राजनामा.कॉम के संपादक को उन लोगों के साथ नामजद किया गया है, जिन्हें वे जानते-पहचानते तक नहीं हैं और न ही इस साइट से कोई जुड़ाव है। हां, एक बात है। उसमें राजगीर के एक सम्मानित पत्रकार राम बिलास जी का भी नाम शामिल है। इस बात मुकेश भारतीय का स्पष्ट कहना है कि राम बिलास नालंदा के एक वरिष्ठ और सम्मानित पत्रकार हैं। वे साईट के संवाददाता क्या, उनके एक हामी पर उन जैसे सरल सादगी के प्रतीक नालंदा की पत्रकारिता के दूत के लिये संपादक तक पद भी छोटा पड़ जायेगा। बहरहाल, मुकेश भारतीय ने नालंदा पुलिस-प्रशासन पर कई सबाल उठाये हैं...

1. क्या एफआईआर दर्ज करने वाली राजगीर थाना पुलिस को प्रेस विधि का ज्ञान है। अगर है तो फिर किस आधार पर केस दर्ज किया गया।
2. समाचार प्रसारण की अपनी प्रतिक्रियाएं होती है। उस पर आपत्ति या खंडन का विशेष महत्व होता है। समाचार प्रकाशन के बाद कथित फर्जी पत्रकार शिवनंदन ने साइट संचालक से लंबी बहस की थी और एफआईआर के पहले तरह-तरह की धमकियां दी थी।
फिर भी राजनामा के संपादक ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि अपनी आपत्ति सप्रमाण दर्ज करें, साइट पर उसे प्रमुखता से स्थान दिया जायेगा।
3. जिला प्रशासन या राजगीर पुलिस यह बताये कि कथित फर्जी पत्रकार का राजगीर गेस्ट हाउस होटल मलमास मेला की सैरात जमीन पर नहीं हैं।
4. जिला प्रशासन या राजगीर पुलिस यह भी बताये कि कथित फर्जी पत्रकार ने गौ रक्षणी भूमि को अतिक्रमित नहीं कर रखा है।
5. जिला प्रशासन या राजगीर पुलिस यह भी बताये कि कथित फर्जी पत्रकार जिस आवंटित दुकान को आवासीय बना रखा है, उसकी प्रकृति क्या है।
6. जिला प्रशासन या राजगीर पुलिस यह भी बताये कि नालंदा की पावन व ऐतिहासिक धरती की मनोरम गोद में बसे राजगीर की रौनकहर्ता का साथ देगी या उसे स्वच्छ-पवित्र रखने की मुहिम छेड़ने वालों की। क्योंकि राजनामा.कॉम के पास जिस तरह के साक्ष्य मिले हैं, वे साफ स्पष्ट करते हैं कि सफेदपोशों के खिलाफ पुलिस-प्रशासन की सदैव उलटी कार्रवाई होती रही है।

राजनामा.कॉम के संपादक मुकेश भारतीय का कहना है कि वे फिलहाल भले हीं नालंदा में नहीं प्रवास कर रहे हों लेकिन, उनका जन्म, लालन-पोषन, बचपन, शिक्षा-दीक्षा उसी पावन मिट्टी में गुजरा है और वे जल्द ही साइट संचालन कमिटि की आपात बैठक कर अहम फैसला ले सकते हैं। वे सब कुछ सह सकते हैं लेकिन नालंदा के सम्मान से समझौता कदापि नहीं। अंजाम चाहे जो भी हो।

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