पीआईएल में आरोप : रहमानी, फारूकी ने लिये आईएसआई से पैसे

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नयी दिल्ली, 11 मई, देश में लैंगिक समानता के सरकार के प्रयासों को नाकाम करने और तीन तलाक जैसे विवादित मामलों में शरीयत कानून को वाजिब ठहराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के वास्ते अॉल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के पदाधिकारियों द्वारा पाकिस्तान से हवाला के जरिये धन हासिल करने का एक मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया गया है और इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अथवा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा कराये जाने की मांग की गयी है। उच्चतम न्यायालय के वकील अब्दुल रहमान ने आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि देश के 20 करोड़ मुसलमानों की नुमाइंदगी करने वाले एमआईएमपीएलबी के कुछ पदाधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ‘इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस’ (आईएसआई) की साजिश में शागिर्द हैं, जिसके पुख्ता प्रमाण उनके पास मौजूद हैं। श्री रहमान ने जनहित याचिका में दावा किया है कि बोर्ड के महासचिव वली रहमानी, सचिव मोहम्मद फजलुर रहीम मजद्देदी, जफरयाब जिलानी तथा सदस्य कमल फारूकी ने पाकिस्तान सरकार से सम्पर्क करके मुसलमानों से संबंधित शरीयत कानून का बचाव करने, बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण तथा लैंगिक समानता को लेकर मोदी सरकार के प्रयासों पर पानी फेरने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से धन उपलब्ध कराने की गुहार लगायी थी। उन्होंने अपनी याचिका में यह भी दावा किया है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में आईएसआई ने इसके लिए दुबई के हवाला ऑपरेटर के जरिये धन मुहैया कराया था और श्री रहमानी ने इसे दिल्ली में हासिल किया था। वर्ष 2011 से इंडियन इंटेलीजेंस के लिए काम करने का दावा करने वाले इस वकील ने कहा है कि उसे यह जानकारी आईएसआई के विश्वस्त सूत्रों से मिली थी। यह जानकारी भारत सरकार को भी उपलब्ध करायी जा चुकी है। याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय से राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर एआईएमपीएलबी के खातों की जांच कराने की मांग की है। इतना ही नहीं उन्होंने हवाला कारोबार के जरिये धन हासिल करने के मामले में बोर्ड के पदाधिकारियों की भूमिका की सीबीआई या एनआईए से जांच कराने की मांग भी की है। उन्होंने दावा किया है कि कुछ महत्वपूर्ण ऑडियो प्रमाण उनके पास मौजूद हैं, जिन्हें वह उच्च न्यायालय को आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध करा सकते हैं। न्यायालय जल्द ही इस मामले की सुनवाई करेगा। श्री रहमान का दावा है कि इंडियन इंटेलीजेंस के लिए काम करने के दौरान उन्हें पाकिस्तान उच्चायोग का कानूनी सलाहकार नियुक्त किया गया था और इसी के माध्यम से उन्होंने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों और राजनयिकों के साथ अपनी पैठ बढ़ायी थी। आईएसआई के लोगों ने ही उन्हें हवाला कारोबार से पैसा लिये जाने और भारत में सामाजिक सौहार्द बिगाड़कर मोदी सरकार को अस्थिर करने की साजिश की जानकारी दी है।

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