मोदी सरकार वादा पूरा कर दे तो किसानों की अधिकांश समस्या का हो जायेगा समाधान : नीतीश

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पटना 12 जून, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देश में उत्पन्न कृषि संकट को दूर करने के लिए किसानों की कर्ज माफी को नाकाफी बताया और कहा कि यदि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार किसानों को उत्पादन लागत पर 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने का अपना सिर्फ एक वादा पूरा कर देती है तो किसानों की अधिकांश समस्याओं का समाधान हो जायेगा। श्री कुमार ने यहां मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभाकक्ष में आयोजित 'लोक संवाद' कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र समेत देश के अन्य हिस्सों में किसान आंदोलन करने के लिए विवश हो गये। आज देश में कृषि संकट की स्थित उत्पन्न हो गई है। किसान अपने उत्पादों को खेतों में ही छोड़ने और सड़कों पर फेंकने के लिए क्यों विवश हुए, इसपर गहरायी से सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि फसलों का उत्पादन बढ़ा है, लेकिन किसानों को उसका सही दाम नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि संकट का मुख्य कारण यह है कि किसानों की फसल उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है लेकिन किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। मूल समस्या यही है। उन्होंने कहा कि अकेले कर्ज माफी इस समस्या का समाधान नहीं है। कर्ज माफी कर किसानों का आंदोलन कुछ देर के लिए रुक सकता है लेकिन  किसानों के संकट का स्थाई समाधान नहीं हो सकता है। श्री कुमार ने कहा कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार यदि किसानों को उत्पादन लागत पर 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर समर्थन मूल्य देने का अपना चुनावी वादा पूरा कर देती है तो सिर्फ इससे ही किसानों की अधिकांश समस्याओं का समाधान हो जायेगा। उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने लोकसभा चुनाव से पहले किसानों से वादा किया था कि उनकी सरकार बनने के बाद लागत मूल्य पर 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करेगी लेकिन चुनाव जीतने के बाद मोदी सरकार अपना वादा भूल गयी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि मंत्रालय का सिर्फ नाम बदलकर कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय करने से नहीं होगा जब तक कि इसमें सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाये। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को किसानों के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनानी चाहिए ताकि किसानों की आमदनी बढ़े तथा उनके बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए बेहतर व्यवस्था हो सके श्री कुमार ने कहा कि वह आनुवांशिक रूप से संशोधित (जीएम) बीज के इस्तेमाल का शुरू से विरोध करते रहे हैं क्योंकि यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न करता है बल्कि किसानों के भी हित में नहीं है। पर्यावरणविद् तथा कृषि विशेषज्ञों ने भी इसका विरोध किया है। उन्होंने बीटी कॉटन का उदाहरण देते हुये कहा कि लोगों को ऐसा लगा था कि इससे बीमारियों से मुक्ति मिल जायेगी लेकिन इसके आने से बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने बीजों पर अपना एकाधिकार कर लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएम बीज के प्रभाव का अध्ययन होना चाहिये। जीएम बीज पर बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपना  एकाधिकार बनायेगी, मुनाफा कमायेंगी तथा किसान उन पर निर्भर हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि सरसों के जीएम बीज के इस्तेमाल से शहद उत्पादन पर सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ेगा। श्री कुमार ने कहा कि केन्द्र सरकार ने पिछले वर्ष फसल बीमा योजना लागू की है जिसका फायदा सिर्फ फसल बीमा कंपनियों को हो रहा है। उन्होंने कहा कि बीमा प्रीमियम के तौर पर किसान, केन्द्र और राज्य सरकार ने बड़ी रकम फसल बीमा कपंनियों को दी लेकिन किसानों को फसल बीमा योजना के अंर्तगत काफी कम भुगतान किया गया ।


मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में किसानों की आमदनी में भारी गिरावट आयी है। यही कारण है कि खेती से जुड़े जाट, मराठा और पाटिदार समुदाय के लोग सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की हालत बेहद बदतर है और उनकी आमदनी ग्रुप डी के सरकारी कर्मचारियों से भी कम है। श्री कुमार ने एक सवाल के जवाब में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी विपक्ष की सभी पार्टियों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं जो स्वागत योग्य है। विपक्ष की पार्टियों ने राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर बातचीत की है। उन्होंने कहा, "हम राष्ट्रपति चुनाव के लिए सरकार की तरफ से आम सहमति बनाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं और यदि इसपर आम सहमति नहीं बनी तो विपक्ष की ओर से एक साझा उम्मीदवार उतारा जायेगा।" मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष की ओर से साझा उम्मीदवार देने में कोई देरी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के बड़े नेता बैठेंगे तब 15 से 20 मिनट में उम्मीदवार पर अंतिम फैसला हो जायेगा । आज के लोक संवाद कार्यक्रम में सामान्य प्रशासन, पुलिस, गृह, निगरानी, पंचायती राज, सहकारिता, नगर विकास एवं आवास, मद्य निषेध निबंधन एवं उत्पाद विभाग, वाणिज्य कर, राजस्व एवं भूमि सुधार, खान एवं भू-तत्व, परिवहन तथा आपदा प्रबंधन विभाग से संबंधित मामलों पर 05 लोगों ने मुख्यमंत्री को अपना सुझाव दिया। सुझाव देने वालों में पटना के सुबोध कुमार, अमित सिंह और सीमा सिंह, भागलपुर के राजीव झा और औरंगाबाद के दिनेश प्रसाद सिंह शामिल थे। लोक संवाद कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री आलोक कुमार मेहता, नगर विकास एवं आवास मंत्री महेश्वर हजारी, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. मदन मोहन झा, परिवहन मंत्री चन्द्रिका राय, खान एवं भूतत्व मंत्री मुनेश्वर चौधरी, आपदा प्रबंधन मंत्री चन्द्र शेखर, पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत, राज्य के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक पी. के. ठाकुर तथा मंत्रिमण्डल समन्वय विभाग के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा के अलावा अन्य विभागों के प्रधान सचिव और सचिव उपस्थित थे। 
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