श्रीकांत बने इंडोनेशिया ओपन चैंपियन

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जकार्ता,18 जून, भारत ने किदांबी श्रीकांत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए जापान के काजूमासा सकई को रविवार को लगातार गेमों में 21-11, 21-19 से हराकर पहली बार इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब जीत लिया। श्रीकांत ने इंडोनेशिया ओपन में अपने स्वप्निल प्रदर्शन को फाइनल में भी बरकरार रखा और खिताब अपने नाम किया। श्रीकांत सेमीफाइनल में विश्व के नंबर एक खिलाड़ी कोरिया के सोन वान हो को पराजित किया था और अब फाइनल में उन्होंने जापानी खिलाड़ी को शिकस्त दे दी। विश्व रैंकिंग में 22 वें नंबर के खिलाड़ी श्रीकांत का यह तीसरा सुपर सीरीज खिताब है। उन्होंने इससे पहले 2014 में चाइना ओपन और 2015 में इंडिया ओपन के सुपरसीरीज खिताब जीते हैं। इस खिताबी जीत के बाद श्रीकांत की रैंकिंग में निश्चित रूप से उल्लेखनीय सुधार आयेगा। इंडोनेशिया ओपन में इस बार भारतीय पुरुष खिलाड़ियों का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा। भारत की महिलाओं में ओलंपिक रजत विजेता पीवी सिंधू और पूर्व नंबर एक सायना नेहवाल दूसरे दौर में बाहर हो गयी थीं लेकिन एचएस प्रणय और श्रीकांत ने तिरंगा बुलंद रखा। प्रणय ने करिश्माई प्रदर्शन करते हुए ओलंपिक स्वर्ण विजेता और विश्व चैंपियन चेन लोंग को पराजित किया जबकि श्रीकांत ने विश्व के नंबर एक खिलाड़ी सोन वान हो को धूल चटा दी। भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में यह पहला ऐसा टूर्नामेंट बन गया जिसमें दो भारतीय पुरुष खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक विजेताओं और विश्व के नंबर एक खिलाड़ी को हराया। 18 जून रविवार के जिस दिन पूरा देश और मीडिया भारत और पाकिस्तान के बीच इंग्लैंड के लंदन में चैंपियंस ट्राफी के खिताबी मुकाबले पर टकटकी लगाये बैठा था तो उसी दिन श्रीकांत ने इंडोनेशिया के जकार्ता में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए खिताबी जीत दर्ज की। 


श्रीकांत इंडोनेशिया ओपन खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गये हैं। इससे पहले यह उपलब्धि लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता सायना के नाम थी जिन्होंने 2009, 2010 और 2012 में यह खिताब जीता था। आंध्र प्रदेश के गुंटूर के 24 साल के श्रीकांत ने 10 लाख डालर की पुरस्कार राशि वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के फाइनल में काजूमासा को हराने में मात्र 37 मिनट का समय लगाया और हमवतन प्रणय की काजूमासा के हाथों मिली हार का बदला भी चुका लिया। काजूमासा फाइनल में हार गये लेकिन उनके लिये यह बड़ी उपलब्धि रही कि वह क्वालिफिकेशन से फाइनल तक पहुंचे। श्रीकांत और 47 वीं रैंकिंग के काजूमासा के बीच यह पहला करियर मुकाबला था। भारतीय खिलाड़ी ने मैच में सधी हुयी शुरुआत की और पहले तीन अंक तक दोनों खिलाड़ी लगभग बराबरी पर रहे। श्रीकांत ने 2-3 के स्कोर पर लगातार तीन अंक लेते हुए 5-3 की बढ़त बनाई और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 9-8 के स्कोर पर लगातार पांच अंक और फिर 13-9 के स्कोर पर लगातार छह अंक लेकर 19-9 की मजबूत बढ़त बना ली। श्रीकांत ने 21-11 के स्कोर पर पहला गेम समाप्त कर दिया। दूसरे गेम में काजूमासा ने अच्छी शुरुआत की और जल्द ही 4-2 से आगे हो गये। उन्होंने फिर लगातार तीन अंक लेकर 7-3 की बढ़त बना ली। जापानी खिलाड़ी इस गेम में ज्यादा बेहतर खेल रहे थे और श्रीकांत ने शुरुआत में कुछ गलतियां की जिससे वह पिछड़ गये। काजूमासा ने अपनी बढ़त को 9-4, 11-6 ,12-7 और 13-10 पहुंचा दिया लेकिन जीवट के धनी श्रीकांत ने अपना जज्बा बनाये रखा और लगातार चार अंक लेकर 14-13 से आगे हो गये। काजूमासा ने फिर 17-15 की बढ़त बनाई लेकिन श्रीकांत ने 17-17 पर बराबरी हासिल की। काजूमासा फिर 18-17 और 19-18 से आगे हो गये। श्रीकांत ने इस मौके पर अपना तमाम अनुभव और कौशल झोंकते हुए लगातार तीन अंक हासिल किये और 21-19 से दूसरा गेम तथा खिताब जीत लिया। श्रीकांत अपनी ऐतिहासिक जीत की खुशी पर उछल पड़े और उन्होंने दर्शकों का अभिवादन किया। श्रीकांत इस साल अप्रैल में सिंगापुर ओपन के फाइनल में हमवतन बी साई प्रणीत से तीन गेमों में हार गयेथे लेकिन इंडोनेशिया ओपन में उन्होंने खिताब जीतने का मौका अपने हाथ से फिसलने नहीं दिया। श्रीकांत ने 2014 में चीन के लिन डैन को हराकर चाइना ओपन सुपर सीरीज खिताब जीता था। तब वह सुपर सीरीज खिताब जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने थे और इंडोनेशिया ओपन के साथ उन्होंने अपनी उपलब्धि में एक और ताज जोड़ लिया। 

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