बिहार : कुव्यवस्था की बलि वेदी पर 9 चढ़े 15 दिनों के अंदर सड़क दुर्घटना में मारे गए

  • रफ्तार के सिकन्दर बनने की फिकाक में अंजाम

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पटना. पटना के डी.एम.संजय कुमार अग्रवाल के आदेश से 27 जून से जे.पी.सेतु पर एम्बुलैंस की तैनाती कर दी गयी. संसाधन से लैंस है एम्बुलैंस. चालक के साथ 3 व्यक्ति तैनात रहते हैं. 2 शिफ्ट में कार्य सुबह 8 से रात 8 बजे तक 12 घंटे सेवा करते हैं. दीघा से सोनपुर की 13 किलोमीटर है.इस जेपी सेतु की दूरी को टेम्पों चालक केवल 20 मिनट में तय करते हैं.ऎसी स्थिति में दोपहिया वाहन चलाने वाले वाहवाही लुटने और रिकॉड कायम करने के जोश में होश खोकर गाड़ी चलाते हैं. रफ्तार के सिकन्दर बनने में जान की कीमत लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं. महज 15 दिनों के अंदर 9 लोगों की अकाल मौत हो गयी. लोकल पुलिस हादसा का शिकार लोगों का पोस्टमार्टम करवाकर कार्यांजाम देकर चादर तानकर सो जाती है.


एक बार फिर ब्लैक डे 26 जून साबित
देश में 26 जून,1975 को आपातकाल लागू किया गया. इस दिन को जनतंत्र प्रेमी काला दिवस कहते है. 42 साल काला दिवस बनकर 26 जून,2017 को असगर मियां उर्फ लड्डू मियां के घर आया. सड़क हादसा में पुत्र अमान और एक भगीना अफजल को खो दिया. एक भगीना अहसान रूबेन मेमोरिएल हॉस्पीटल,पाटलिपुत्र में जीवन और मौत से संघर्ष कर रहा है. यहां से नाम कटवाकर महेश नगर स्थित पानी टंकी के पास हॉस्पीटल में भर्ती किया गया है.

ईद की नमाज अता कर निकले थे 3 भाई
दीघा चौहट्टा में रहते हैं असगर मियां. दीघा हाट पर प्याज बेचते हैं. इनका बेटा अमान (16 साल), अहसान (15 साल) और अफजल (17 साल). अमान के अहसान और अफजल मौसेरा भाई हैं. तीनों पढ़ते हैं.अफजल 7 वीं, अमान और अहसान छठी कक्षा में पढ़ते हैं. मोतिहारी से अफजल और फुलवारीशरीफ से अहसान आये थे. तीनों मिलकर दीघा पोस्ट ऑफिस रोड में स्थित मस्जिद में ईद की नमाज अता किये. तीनों मौज-मस्ती मारने के मूड में थे. यह तय किया कि अमान के घर से कुछ दूरी पर रेल-सह-सड़क सेतु है. बाइक निकालकर तय किया गया कि चले जेपी सेतु पर घुमने. एक बाइक पर सवार तीनों नाबालिंग चलें.

राह में कोई कंट्रोल करने वाला नहीं
11जून,2017 को जनता को जेपी सेतु समर्पित कर दी गयी. दीघा से सोनपुर तक ट्रॉफिक कंट्रोल की व्यवस्था नहीं है. और तो और सड़क को डिवाइड नहीं की गयी. डिवाइडर नहीं होने के कारण घुसपैठ की संभावना बढ़ गयी. रफ्तार पर लगाम नहीं होने के कारण हादसों में इजाफा.उद्घाटन 11 जून से 26 जून तक 9 लोगों की मौत हो गयी. इसमें अमान और अफजल भी शामिल है. कहा जाता है कि बोलेरो कार ने पीछे से बाइक में धक्का मार दी. इससे चालक संतुलन खो दिये और धराम से गिर गये. इसके बाद बोलेरों और अन्य वाहन गिर गये नाबालिंगों पर चढ़ाकर चलते जाते. अमान तो मौके पर दम तौड़ दिया.किसी तरह से किसी को फोन नम्बर देकर घर में फोन करवाया गया. परिजन आये और घायलों को रूबेन मेमोरिएल लिया गया. अफजल को भर्ती करने में विलम्ब होने पर वह दम तोड़ दिया. राशि जमा करने के नाम पर हंगामा हुआ.


गांधी सेतु पर छोटे-मझोले वाहनों पर है ब्रेक
इसके कारण क्षेत्र में जबर्दस्त जाम का नजारा देखने को मिल जाती है दीघा. दीघा-आशियाना, पटना-दीघा और दीघा-दानापुर रोड जाम.वजह साफ है उत्तर बिहार की और जाने वाले लोग उतारू हो गये. गांधी सेतु को बंद कर दिया है. सो छोटे वाहन वाले दीघा से सोनपुर जाने में लग गये.दीघा से सोनपुर  13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित  है. कोई तैयारी यातायात और लोकल पुलिस की नहीं है. दीघा और राजीव नगर थाना पुलिस थाने में बैठी रही. आम के साथ बच्चे विलविलाते रहे. सिर्फ 20 मिनट की दूरी तय करने के लिए घंटों इंतजार करते रहे. जरूरी है कि दीघा हार्ट पर सब्जी विक्रेताओं द्वारा मुख्य मार्ग को अतिक्रमण करने वालों से रोड मुक्त हो. विभिन्न स्कूलों के सामने खड़ी बसों को रूकने नहीं दें. टेम्पों चालकों को नियमानुसार टेम्पों चलाने का आदेश निर्गत हो. भारी वाहनों का प्रवेश निषेघ हो.

अच्छा है कि पैदल चलो सेहद के लिए पदयात्रा फायदेमंद
ये हैं रवि कुमार दास.सोनपुर के दरियापुर थानान्तर्गत बरूआ खुशहाल गांव में रहते हैं. इस गांव से टेम्पों पकड़कर सोनपुर आये. टेम्पों चालक को बतौर 7 रू. भाड़ा दिये. इसके बाद नव निर्मित सोनपुर -दीघा मार्ग पर पैदल चलने लगे रवि कुमार दास. वे 2 लड़का और 1 लड़की के पिताश्री हैं. 1.20 मिनट तय करके सोनपुर से दीघा पहुंचे. दीघा में आइसक्रीम बेचते है. 3 -4 दिन के बाद घर जाते हैं. बच्चे पढ़ने जाते हैं. पत्नी घर का कार्य करती हैं. यह पूछने पर जूता-चप्पल बनाने वाले पुश्तैनी कार्य क्यों नहीं करते हैं? इस पर कहते हैं कि पेट भरने लायक कमाई नहीं है. अत: परिवार और बच्चों की भलाई में पुश्तैनी कार्य को टा-टा-बाई-बाई कर दिये. पत्नी के पास अधिक कार्य है, इसके आलोक में पुश्तैनी धंधा नहीं कर सकती. ज्ञातव्य है कि सोनपुर से दीघा की दूरी 14 किलोमीटर है. इस दूरी को पैदल चलके 1.20 मिनट में तय की जाती है. टेम्पों से सिर्फ 20 मिनट में. इसके लिए 30 रू.भाड़ा दिया जाता है.
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