बिहार : घास काटने वाला विश्वकर्मा कुमार मैट्रिक पास

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पटना. आजकल मूल्यहीन कार्य करने वाले शर्माते नहीं और नि:संकोच बोलते हैं कि घास काटकर गौ माता को खाने के लिये देते हैं.दूध दूहते हैं. क्या बात है कि आप में पी.एम.और सी.एम.का गुण है. पी.एम. नरेंद्र मोदी ने चाय बेचकर बहुत आगे निकल गये हैं. आप तो घास काटकर मैट्रिक पासकर गये. पूर्व सी.एम. लालू प्रसाद यादव ने गौ माता के गवत और दूध दूहते थे.आप भी गवत देते और दूध दूहते हैं. खैर, पूर्व मध्य रेलवे परियोजना से विस्थापित होकर गंग स्थली में रहते हैं बिंद समुदाय के लोग. न्यू बिंद टोली,कुर्सी नाम दिया है.यहां पर जनवरी,2016 में आये हैं.अभी तक वासगीत पर्चा निर्गत नहीं किया गया है.यहां के लोग आवासहीन/भूमिहीन हैं. इसमें विश्वकर्मा कुमार के पिताश्री राजनाथ महतो भी हैं. सभी भूमिहीन 4 हजार बीघा जमीन लेकर खेती करते हैं. सब्जी उपजाते हैं. विश्वकर्मा कुमार कहते हैं कि उनके साथ 4 भाई और 2 बहन हैं.2 दीदी की और  2 भाइयों की शादी हो गयी है. आगे कहते कि श्रीचन्द्र उच्च विघालय,बालूपर में पढ़ते हैं. वहीं से 10+2 करेंगे. 2 से 3 तीन हजार रू.खर्च होगा. शिक्षा के प्रतिकुल वातावरण में मैट्रिक पास करने वाले कहते हैं कि सरकारी स्कूल उठाकर गोसाई टोला लिया गया है. सड़क हादसा होने की अंदेशा से बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं.परिजन फैशन की तरह किसी व्यक्ति से बच्चों को पढ़वाते हैं. कोई दर्जनभर बच्चे निजी विघालय में पढ़ने जाते हैं. यहां पर पेयजल की किल्लत है. शौचालय निर्माण किया गया, उसका इस्तेमाल नहीं करते है.2016 की बाढ़ झेलने वाले परेशान होने लगे हैं. लगातार बारिस होने से घबड़ा गये हैं. आने वाले से कहते है कि 2017 में इधर से पानी आकर बिंद टोली में तबाही मचा देगा.

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