सेनाओं को मिली ठिकानों की सुरक्षा पर पैसा खर्च करने की छूट

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नयी दिल्ली 27 जुलाई, सरकार ने पठानकोट वायु सैनिक अड्डे पर आतंकवादी हमले जैसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से तीनों सेनाओं को सभी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा चाक चौबंद करने के लिए बिना औपचारिक मंजूरी के पर्याप्त राशि खर्च करने की छूट दे दी है। रक्षा मंत्री अरूण जेटली ने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए तीनों सेनाओं को अपने ठिकानों की चारदिवारी और आस पास सुरक्षा व्यवस्था पर बिना औपचारिक मंजूरी के पर्याप्त पैसा खर्च करने का वित्तीय अधिकार दिया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह निर्णय सैन्य ठिकानों और रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक उपकरण और प्रणालियों की खरीद की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए उठाया गया है। इस निर्णय के तहत तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों को रक्षा मंत्रालय से मंजूरी लिये बिना सुरक्षा उपकरणों और प्रणालियों की खरीद तथा निर्माण कार्य कराने का अधिकार दिया गया है। इस कदम से तीनों सेनाओं के सुरक्षा संबंधी खर्च के अधिकार में अत्यधिक बढोतरी हो जायेगी। रक्षा मंत्री ने साथ ही सेनाओं को सुरक्षा संबंधी कार्यों को निश्चित समय में पूरा करने के भी सख्त आदेश दिये हैं। उल्लेखनीय है कि सीमा पार से आये आतंकवादियों ने पिछले वर्ष पठानकोट वायु सैनिक अड्डे पर बड़ा आतंकवादी हमला किया था जिसमें सात जवान शहीद हो गये थे। इससे पहले इसी महीने के शुरू में सरकार ने सेना को किसी भी तरह की आकस्मिक स्थिति से निपटने में पूरी तरह सक्षम बनाने के उद्देश्य से जरूरी हथियारों और गोलाबारूद की खरीद के असीमित वित्तीय अधिकार देने की घोषणा की थी। सरकार ने अधिसूचना जारी कर कहा था कि सेना उप प्रमुख को किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए हथियारों , पुर्जों और गोला बारूद की कमी को पूरा करने के लिए असीमित वित्तीय अधिकार दिये गये हैं। सेना को यह अधिकार हथियारों और गोला बारूद के भंडार को जरूरी निर्धारित स्तर तक बनाये रखने के लिए दिये गये हैं। सेना उप प्रमुख को असीमित वित्तीय अधिकार होंगे और वह जरूरत के हिसाब से कितनी भी खरीद कर सकेंगे। मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार के इन फैसलों को बडे नीतिगत और महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। पिछले काफी समय से यह महसूस किया जा रहा था कि सेना के जरूरत के अनुरूप हथियारों और गोलाबारूद का भंडार नहीं है और इस संबंध में लगातार मांग उठ रही थी। सेना को इसके लिए मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति तथा रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद से मंजूरी लेने की भी जरूरत नहीं होगी। अभी तक पांच हजार करोड रूपये से अधिक की खरीद के लिए सुरक्षा मामलों की समिति से मंजूरी लेनी जरूरी थी।

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