43, 726 श्रद्धालुओं ने दिन शनिवार को बाबा पर जलार्पण किया

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव वासुकिनाथ धाम 2017 में दिन शनिवार को कुल 43, 726 श्रद्धालुओं ने बाबा वासुकिनाथ का जलाभिषेक किया। जिनमें शीघ्र दर्शनम 933,  जलार्पण काउण्टर से 1, 988, निकास द्वार से दर्शनार्थी 40, 805 रहे। राजकीय श्रावणी मेला वासुकिनाथधाम में आज कुल चढ़ावा राषि 119476 रु0 रहा। जिसमें गोलक से 84270 रु0, जलार्पण काउण्टर से 21, 250 तथा अन्य स्रोत से कुल चढ़ावा राषि 13, 956 रु0 रहा। चढ़ावा चांदी का द्रव्य 101 ग्राम रहा। 10 ग्राम चांदी का सिक्का 4 अदद तथा 5 ग्राम चांदी का सिक्का 12 अदद बिक्री हुआ। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाये गये विभिन्न चिकित्सा शिविरों में मेला प्रारंभ होने से लेकर अबतक कुल 90, 099 श्रद्धालुओं का निःषुल्क चिकित्सा किया जा चुका है। 05 अगस्त 2017 को कुल 2, 723 श्रद्धालुओं का निःशुुल्क चिकित्सा किया गया। जिनमें मुख्य प्रसासनिक शिविर के 579, स्वास्थ्य उपकेन्द्र 89, स्वास्थ्य शिविर (सूचना मंडप) 57, स्वास्थ्य शिविर बस स्टैण्ड 105, वासुकिनाथ रेलवे स्टेषन 91, रेफरल अस्पताल वासुकिनाथ 57, राजस्व तहसील कचहरी 140, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जरमुण्डी 43, कांवरिया धर्मशाला सहारा 32, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तालझारी 68, स्वास्थ्य उपकेन्द्र कटहराटाड़ 14, स्वास्थ्य शिविर बोगली 32, स्वास्थ्य शिविर मोतिहारा 18, स्वास्थ्य शिविर सुखजोरा 21,  ओआरएस/इमरजेंसी काउन्टर के 175, चलन्त चिकित्सा वाहन से 90 एवं टेन्ट सीटी एवं वैक्सीन काउंटर से 1112 श्रद्धालु रहे। सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजनः- पर्यटन, कला, संस्कृति एवं खेल-कूद विभाग के तत्वावधान में श्रावणी मेला के अवसर पर वासुकिनाथ धाम मंे सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में रांची की नाट्य संस्था ’’एक्सपोजर’’ ने बासुकीनाथ में ’’शिव गाथा’’ नामक नृत्य नाटिका का मंचन लगातार दूसरे दिन किया। इस नृत्य नाटिका का मंचन गुरुवार एवम शुक्रवार को बासुकीनाथ धाम स्थित मयूराक्षी कलामंच में किया गया। संजय लाल द्वारा निर्देशित यह नृत्य नाटिका पूर्ण रूप से षिव तांडव पर आधारित है। दरसल नाटक का आरंभ शिव आराधना से होती है। जहां सती शिव आराधना में लीन होकर उनकी वंदना करती है। सती बिना निमंत्रण के अपने पिता दक्ष के दरबार में जाती है। जहां भगवान शिव को अपमानित किया जाता है। इस अपमान को सती सहन नहीं कर पाती है और प्रज्वलित हवनकुंड में स्वयं को पतिव्रता स्त्री की तरह अग्नि में समाहित हो जाती है। भगवान शिव, सती के पार्थिव शरीर को कंधे पर उठाकर तांडव नृत्य करने लगते हैं। जो कि उनके क्रुद्ध स्वरूप को प्रदर्शित करता है। भगवान विष्णु सती के पार्थिव शरीर को अपने चक्र से विखंडित कर देते हैं। तब जाकर शिव का तांडव बंद होता है और धीरे-धीरे क्रोध शांत होता है। सती का पुनर्जन्म पार्वती के रूप में होता है और शिव-पार्वती का विवाह संपन्न होता है। वाासुकिनाथ के दर्शकों ने मंगलवार को सती के रूप में स्वास्तिका शर्मा की जमकर तारीफ की। वहीं शिव के रूप में रोहित मिश्रा ने अपने कला का अद्भुत प्रदर्शन किया। नाट्य मंचन के दौरान वाासुकिनाथधाम आये श्रद्धालुओं एवं यहां के नागरिकों ने तारीफ तो की ही, साथ ही तालियों की गड़गड़ाहट से कार्यक्रम स्थल गूँज उठा। इस 40 मिनट के नृत्य नाटिका के दौरान एक पल भी निरस नहीं लगा, बल्कि कलाकारों ने दर्शकों की ओर से प्रशंसा बटोरी। इस नृत्य नाटिका का मुख्य केन्द्र सती की पति परायणता और शिव भक्तों के टीम का विहंगम तांडव नृत्य रहा। इस नृत्य नाटिका को सफल बनाने में मुख्य रूप से एक्सपोजर के सन्नी कुमार, अशोक कुमार गोप, रोहित मिश्रा, रोहित पांडेय, स्वस्तिका शर्मा, अजीत श्रीवास्तव, अंजली पाठक, अवनिश भारद्वाज, विशाल प्रसाद, हर्ष प्रसाद, हर्षित देव, नितेश कुमार, विपुल कुमार, कुलदीप सोरेन, राजा पांडेय, दीक्षा कर्मकार, ज्योति कुमारी, अंकिता चैधरी, आकांक्षा चैधरी, हिमांशु कुमार, प्रणय प्रबोध पाठक, रंजन कुमार, आयूषी भद्र, अनूप कुमार ठाकुर, आर्यन कुमार, आशिष नाग, विजय चमार, विनोद कोरिया, आशिष गाड़ी, छोटू नायक, बिरजू डोम, सुमित लोहरा, आनंद खड़िया सहित 45 कलाकारों की टीम ने प्रस्तुति में अहम भूमिका निभाई। वहीं सुनिता कुमारी ने रूप सज्जा और दीपक चैधरी ने प्रकाश व्यवस्था में अहम योगदान दिया।

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