सुनंदा मामला : दिल्ली पुलिस से दो सप्ताह में न्यायालय ने मांगी स्थिति रिपोर्ट

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नयी दिल्ली 30 अगस्त, दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत मामले में पुलिस से दो सप्ताह के भीतर जांच की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। न्यायमूर्ति जी एस सिस्तानी और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की युगल पीठ ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी की न्यायालय की निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूराे (सीबीआई) की अगुवाई वाली बहु-अनुशासनात्मक जांच संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान जांच में चल रही देरी को लेकर दिल्ली पुलिस को आज लताड़ लगायी। अतिरिक्त महाधिवक्ता संजय जैन के इस कथन के बाद कि अब तक जो जांच हुई है उसे न्यायालय देख सकता है, युगल पीठ ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह इसे जरूर देखेगी। उन्होंने दावा किया कि इस जांच में कोई ढिलाई नहीं बरती गयी है और न्यायालय चाहे तो इसमें शामिल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से अपने चैम्बर में जानकारी ले सकता है। दिल्ली पुलिस का कहना था कि इस मामले से जुड़ी विभिन्न वैज्ञानिक रिपोर्ट मिलने में देरी हुई है। उसकी तरफ से जांच में किसी भी प्रकार की देरी या ढ़िलाई नहीं बरती गयी है। पुलिस का कहना था कि तकनीकी जांच पूरी तरह से उसके हाथ में नहीं है। इसमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और कुछ विदेशी एजेंसियां भी शामिल हैं। सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी 2014 को पंचतारा लीला होटल के कमरा नंबर 345 में संदिग्ध अवस्था में मृत पायी गयीं थी। यह कमरा तभी से सील है। होटल प्रबंधन ने कमरा खोलने के लिए न्यायालय में पिछले दिनों याचिका दायर की थी उस समय भी न्यायालय ने मामले की जांच में हो रही देरी को लेकर दिल्ली पुलिस पर नाराजगी जतायी थी। युगल पीठ ने कहा कि यह उचित नहीं होगा कि जांच का काम या निगरानी न्यायालय करे लेकिन वह यह जरूर जानना चाहेगी कि इस मामले में जांच कहां तक पहुंची है। पीठ ने कहा कि यह मामला जनवरी 2014 का है और अब आधा से अधिक यह साल भी निकल चुका है। तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कुछ भी ठोस सामने नहीं आया है। खंडपीठ ने कहा,“ हमें आपकी रिपोर्ट देखने में हिचक नहीं होगी, लेकिन हम जांच की निगरानी करें यह ठीक नहीं है।” न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तारीख तय करते हुए श्री जैन से कहा कि तब तक वह इस बारे में जानकारी हासिल करें कि इस मामले में कहां तक प्रगति हुई है।

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