ज्योतिष : एनआरआई के लिए अशुभ रहेगा खग्रास सूर्य ग्रहण

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सूतक काल वहीं पर होता है, जहां ग्रहण की छाया होती है पर सूर्य और चंद्रमा को सनातन धर्मावलंबी माता-पिता की संज्ञा देते हैं इनके ऊपर कहीं पर भी ग्रहण पड़े उसका प्रभाव संपूर्ण पृथ्वी पर पड़ता है। विदेशों में बहुत सनातन धर्मावलंबी निवासरत हैं जिनके लिए यह ग्रहण शुभ नहीं है। 21 अगस्त को खग्रास सूर्यग्रहण की छाया विदेशों में रहेगी, जो शोध का विषय बनेगा। इस ग्रहण के प्रभाव से ग्रहण पथ में कुछ देर के लिए अंधेरा छा जाएगा। शा ों के अनुसार एक पखवाड़े में दो ग्रहणों का पडऩा खतरे की घंटी है। गौरतलब है कि इस ग्रहण के 15 दिन पूर्व 7 अगस्त को चंद्रग्रहण हुआ था। इसके प्रभाव से राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक स्थितियां बिगड़ेंगी, देश में युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं, आतंकीय घटनाएं बढ़ेंगी एवं इस ग्रहण के प्रभाव से मकर राशि प्रभावित होगी। चूंकि मकर राशि मध्यप्रदेश की प्रभाव राशि है। अत: मध्यप्रदेश में भी इस ग्रहण का असर देखने को मिलेगा। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के सभी देश इस ग्रहण के प्रभाव से संकट का सामना करेंगे। अमेरिकी स्टेट को इस दौरान सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।अमेरिका एवं अन्य देशों में तीन मिनट के लिए दिन में ही रात्रि जैसा माहौल बन जाएगा। यह खग्रास ग्रहण 2017 का आखिरी ग्रहण है। 


सूर्यग्रहण- भाद्रपद कृष्ण ३० सोमवार (२१ अगस्त २०१७) को लगने वाला खग्रास सूर्यग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। यह ग्रहण संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी भाग रे पूर्वी भाग तक खग्रास रूप से दिखाई देगा। ग्रहण पथ प्रशांत महासागर से प्रारंभ होकर संयुक्त राज्य अमेरिका को पार कर अटलांटिक महासागर में समाप्त होगा। खंडग्रास रूप में यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका के उत्तरी भाग, अटलांटिक महासागर, यूरोप के पश्चिमी भाग, उत्तर-पूर्व एशिया, उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका, प्रशांत महासागर और आर्कटिक क्षेत्र में दृश्य होगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण का प्रारंभ रात्रि ९.१५ पर, मध्य रात्रि ११.५० पर तथा मोक्ष रात्रि २.३३ बजे होगा। इस ग्रहण का ग्रासमान १.०३ पर होगा।

ग्रहण वेध- सूर्य ग्रहण के स्पर्श (प्रारंभ होने) से चार प्रहर अर्थात १२ घंटे का  होता है। जिसे सूतक कहते हैं। सूतककाल में मूर्ति स्पर्श, पूजा-पाठ, अनुष्ठान, ध्यान निषेध हैं। इस समय संकीर्तन पाठ, रामनाम जाप एवं सूर्य मंत्र का जाप करना चाहिए। ग्रहण समाप्ति के पश्चात स्नान, दान, पूजा-पाठ इत्यादि अवश्य करनी चाहिए। ग्रहणकाल में गर्भवती ियों को सावधानी रखनी चाहिए। रोगी, वृद्धजनों एवं बालकों को धार्मिक नियमों के भंग होने का दोष नहीं लगता। सूर्यग्रहण को नंगी आंखों से देखना हानिप्रद होता है, जिस राशि में ग्रहण होता है उस राशि वालों को अनिष्ठ फल देता है। जहां पर ग्रहण की छाया पड़ती है वहां पर ही ग्रहण का सूतक मान्य होता है। ग्रहण के अनिष्ठ फल से बचने के लिए स्वर्ण निर्मित सर्प कांसे के बर्तन में तिल, व एवं दक्षिणा के साथ श्रोत्रिय ब्राह्मण को दान करना चाहिए अथवा सोने या चांदी का ग्रह बिम्ब बनाकर ग्रहण जनित दुष्ट फल निवारण हेतु दान करना चाहिए।



ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम
ज्योतिष मठ संस्थान
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