कोविंद ने लद्दाख स्काउट्स को राष्ट्रपति कलर्स प्रदान किया

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लेह, 21 अगस्त, चीन और पाकिस्तान के साथ जारी तनातनी के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लेह का दौरा किया और लद्दाख स्काउट्स को ‘राष्ट्रपति कलर्स’ प्रदान किया। श्री कोविंद ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली यात्रा है और इसके लिए उन्होंने लेह को चुना है। उन्होंने अपनी इस यात्रा को सशस्त्र सेना के जवानों को समर्पित करते हुए कहा, “सशस्त्र सेनाओं का ‘सुप्रीम कमांडर’ होने के नाते, मेरी यह यात्रा सशस्त्र सेनाओं के जवानों को समर्पित है।” राष्ट्रपति ने लद्दाख स्काउट्स की वीरता और अदम्य साहस की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज से 54 वर्ष पहले यह रेजीमेंट भारतीय सेना का हिस्सा बनी। उन्होंने कहा, “इस रेजीमेंट का वर्षों का सफर वीरता, सम्मान और गौरव की गाथाओं से भरा हुआ है। वर्ष 1947-48 में पाकिस्तानी हमले के दौरान, रेजीमेंट की स्थापना हुई और लद्दाखी लोग जोश के साथ अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए उठ खड़े हुए। यह पराक्रम पूरे देश के लिए गौरव की एक मिसाल है।” उन्होंने कहा, “1962 में चीन के हमले के समय भी लद्दाख के लोगों ने अपनी बहादुरी और बलिदान का परिचय दिया। एक बार फिर उसी प्रकार की कीर्ति अर्जित की। वास्तव में, आप लोग ही हिमालय के रक्षक हैं। लगभग आधी सदी के समय में, इस रेजीमेंट ने कुल 605 सम्मान और पदक प्राप्त किए हैं। यह रेजीमेंट के सैनिकों की असाधारण वीरता और विशिष्ट सेवा का प्रमाण है और हमारी सेना के सभी जवानों और अधिकारियों के लिए एक आदर्श।” राष्ट्रपति ने कहा, “विश्व के कठिनतम भू-भागों और सर्वाधिक असहनीय जलवायु वाले स्थानों में तैनात आप सबने अपनी संख्या की तुलना में कई गुना अधिक शक्ति का परिचय दिया है। आज के इस अवसर पर मैं समूचे लद्दाख स्काउट्स कुटुंब के सभी सैनिकों और उनके परिवारजनों को अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। भारतीय सेना को और पूरे देश को, आप पर गर्व है।” उन्होंने कहा, “हमने सभी संकटों में देश की सम्प्रभुता की रक्षा का संकल्प लिया है। मुझे भरोसा है कि हम इस संकल्प को जरूर पूरा करेंगे और किसी भी कीमत पर अपने राष्ट्र की आन, बान और शान को कायम रखेंगे।” श्री कोविंद ने बाद में महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर में विश्च शांति के लिए बुद्ध पार्क का शिलान्यास किया। ‘राष्ट्रपति कलर्स’ सेना की ऐसी बटालियनों को प्रदान किये जाते हैं, जिन्होंने युद्ध के मैदान में वीरता की मिसाल कायम की हो। लंबी चयन प्रक्रिया के बाद ऐसी बटालियन चुनी जाती हैं, जो देश के लिए कुर्बानियां देने में आगे रही हों।

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