सृजन घोटाले के फरार अभियुक्त रजनी और अमित पर जारी होगा लुकाआउट नोटिस : डीजीपी

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पटना 21 अगस्त, बिहार सरकार ने आज कहा कि भागलपुर की स्वयंसेवी संस्था सृजन में करीब 900 करोड़ रुपये के सरकारी राशि गबन के मामले में फरार चल रही संस्था की सचिव सह कर्ताधर्ता रजनी प्रिया और उनके पति अमित कुमार की गिरफ्तारी के लिए गृह मंत्रालय से लुक आउट नोटिस जारी करने का जहां आग्रह किया गया है वहीं सभी हवाईअड्डा के निदेशकों को सूचना दे दी गई है। राज्य के पुलिस महानिदेश पी. के. ठाकुर ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकारी राशि के इस घोटाला मामले में फरार चल रही सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड की सचिव रजनी प्रिया और अमित कुमार देश से बाहर भाग न सकें, इसके लिए अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने गृह मंत्रालय से इनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी करने का आग्रह किया है। साथ ही उनदोनाें का पासपोर्ट जब्त करने की भी कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो एवं अन्य केंद्रीय एजेंसियों के जरिये इन अभियुक्तों के बारे में सूचना सभी बंदरगाहों एवं हवाईअड्डों को भेज दी गई है। 



पुलसि महानिदेशक ने बताया कि रजनी, अमित और भागलपुर के तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन सिंह की गिरफ्तारी के लिए विशेष अनुसंधान टीम का गठन किया गया है। टीम ने पटना, सुपौल, नवगछिया, बांका, कहलगांव और झारखंड की राजधानी के साथ ही इन अभियुक्तों के छिपने के अन्य संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। इनकी गिरफ्तारी के लिए अन्य राज्यों से भी सहयोग लिया जा रहा है। श्री ठाकुर ने बताया कि इस मामले में जारी अनुसंधान से अबतक 870.88 करोड़ रुपये की सरकारी राशि के अवैध हस्तांतरण एवं गबन उजागर हुआ है। इस मामले में अबतक कुल 18 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जिनमें भागलपुर के जिला कल्याण पदाधिकारी एवं सुपौल के जिला सहकारिता पदाधिकारी सहित कुल छह सरकारी कर्मी, भागलपुर के बैंक ऑफ बड़ौदा एवं इंडियन बैंक के दो प्रबंधक सहित कुल आठ बैंककर्मी तथा सृजन के प्रबंधक एवं दो अन्य और एक चालक शामिल है। उन्होंने बताया कि अभियुक्तों के 18 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों को जब्त किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुये संलिप्त जिला कल्याण पदाधिकारी सहित कुल पांच सरकारी कर्मियों को निलंबित किया गया है। वहीं, बैंक से जुड़े पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ बैंक कार्रवाई कर रहा है। 



पुलिस महानिदेशक ने बताया कि सरकारी राशि के अवैध हस्तांतरण एवं गबन मामले में अबतक 11 मामले दर्ज किये गये हैं। इनमें भागलपुर जिले में नगर विकास, जिला नजारत, भू-अर्जन, सहकारिता, जिला कल्याण, जिला परिषद् एवं स्वास्थ्य विभाग के खातों से 624.86 करोड़ रुपये गबन के नौ, सहरसा जिले में भू-अर्जन शाखा से 162.92 करोड़ रुपये के एक और बांका जिला में भू-अर्जन शाखा से 83.10 करोड़ रुपये का एक मामला शामिल है।उन्होंने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों से इस फर्जीवाड़े में इस्तेमाल किये गये लैपटॉप एवं प्रिंटर को भी जब्त किया गया है। श्री ठाकुर ने बताया कि जांच में कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिससे पता चलता है कि इस संस्था को वर्ष 2003 से ही सरकारी राशि मुहैया कराना शुरू कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि लंबी अवधि का मामला होने के कारण इसकी जांच प्रत्येक वित्त वर्ष के आधार पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुये इसकी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की अनुशंसा की है। पुलिस महानिदेशक ने इस मामले में गिरफ्तार नाजिर महेश मंडल की जेल में हुई मौत पर कहा कि वह पहले से ही मधुमेह से पीड़ित थे और उनकी एक किडनी भी खराब हो गई थी। उनका मुंबई के हिंदुजा अस्पताल और कोलकाता के बी. एम. बिड़ला अस्पताल में इलाज चल रहा था। साथ ही गिरफ्तार होने के बाद उन्हें जेल अस्पताल और जवाहरलाल अस्पताल भागलपुर में भी इलाज कराया जा रहा था। उन्होंने बताया कि श्री मंडल की मृत्यु की जांच मानवाधिकार आयोग के मानकों के अनुरूप कराया जाएगा। 
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