नीतीश भाजपा का ‘अधर्म’ का गठबंधन : ज्योतिरादित्य

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पटना 11 अगस्त, लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बिहार में श्री नीतीश कुमार के महागठबंधन से नाता तोड़ कर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) के साथ सरकार बनाने को ‘अधर्म का गठबंधन’ बताया और कहा कि यह राज्य की जनता के साथ विश्वासघात है। श्री सिंधिया ने आज यहां कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम लिये बगैर कहा, “बिहार में सांप्रदायिक शक्तियों के विरोध में राष्ट्रीय जनता दल(राजद), कांग्रेस और जनता दल यूनाईटेड (जदयू) ने मिलकर महागठबंधन बनाया था, जिसे वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में जनादेश भी मिला। लेकिन, कुछ लोगों ने जनादेश का अपमान करते हुए ‘अधर्म का गठबंधन’ कर सरकार बना ली।” कांग्रेस नेता ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय इसी भाजपा ने बिहार के लोगों के डीएनए को गाली दी थी। इसके बाद महागठबंधन के कुछ लोगों ने इसका करारा जवाब भी दिया था। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों के विरोध में ही जनता ने महागठबंधन को पांच साल सरकार चलाने के लिए जनादेश दिया। लेकिन, कुछ लोगों ने जनता के साथ विश्वासघात किया और महागठबंधन से निकलकर अधर्म का गठबंधन बना लिया। 



श्री सिंधिया ने कहा कि बिहार में जनता के साथ विश्वासघात कर जिस अधर्म की सरकार बनी है, उसके बारे में कांग्रेस राज्य के एक-एक गांव जाकर लोगों को बतायेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस अधर्म के गठबंधन का सड़क से लेकर सदन तक पुरजोर तरीके से विरोध करेगी। कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा किसी तरह से सत्ता हासिल करना चाहती है। यही कारण है कि आज केंद्र से लेकर राज्यों तक विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त आम बात हो गई है। इसका ज्वलंत उदाहरण गोवा और मणिपुर में बनी सरकार और अब गुजरात में संपन्न हुआ राज्यसभा का चुनाव है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बिहार की पावन धरती से ही सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिरने वालों का पुरजोर विरोध शुरू करेगी ताकि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत रह सके। श्री सिंधिया ने बिहार की राजनीति के बदले परिदृश्य में राजद के साथ गठबंधन में कांग्रेस के शामिल रहने के सवाल पर कहा कि आज उन्होंने पार्टी कार्यकर्त्ताओं एवं विधायकों के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा की है। राजद के साथ गठबंधन में पार्टी रहेगी या नहीं रहेगी यह शीर्ष नेतृत्व और बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी तय करेगी। उन्होंने महागठबंधन टूटने के बाद कांग्रेस में दरार की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुये कहा कि यह केवल अफवाह है और इन सब बातों का कोई आधार नहीं है। बिहार में कांग्रेस अटूट है और सभी विधायक एवं कार्यकर्त्ता पार्टी के साथ हैं। 

कांग्रेस नेता ने 27 अगस्त को पटना में होने वाली राजद की रैली में उनकी पार्टी के शामिल होने के सवाल पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली। हालांकि बार-बार पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने या नहीं होने का निर्णय बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ही लेगी। इससे पूर्व कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने बताया कि राज्य के बदले राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए आज आयोजित बैठक में प्रस्ताव पारित कर कहा गया है कि सांप्रदायिक शक्तियों को परास्त करने के उद्देश्य से बनाये गये महागठबंधन और उसके संयुक्त संकल्प को ही विधानसभा चुनाव में जनादेश मिला था। लेकिन, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने उन्हीं सांप्रदायिक ताकतों से हाथ मिलाकर जनता के साथ विश्वासघात किया है, जिसका कांग्रेस विधानमंडल दल घोर निंदा करता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि विधानमंडल दल सर्वसम्मति से यह संकल्प लेता है कि कांग्रेस अपनी विचारधारा पर दृढ़ रहते हुये राज्य में जनता के साथ हुये विश्वासघात का सदन में एवं जनता के बीच जाकर पुरजोर विरोध करेगी। 

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