पनगढिया के इस्तीफे से विकास की गति होगी बाधित : अंजान

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नयी दिल्ली 02 अगस्त, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के वरिष्ठ नेता अतुल कुमार अंजान ने आज कहा कि नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविन्द पनगढिया ने प्रधानमंंत्री कार्यालय के साथ गहरे मतभेदों के कारण इस्तीफा दिया है और इससे देश के विकास की गति बाधित होगी, श्री अंजान ने यूनीवार्ता से बातचीत में दावा किया कि पिछले कुछ महीनों से श्री पनगढिया के प्रधानमंत्री कार्यालय तथा वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ गहरे मतभेद चल रहे थे और इसी के परिणामस्वरुप उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है । उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से नीति आयोग के लिए नीतियां एवं कार्यक्रम बनकर आतें थे और नीति आयोग को उन्ही पर अमल करने को कहा जाता था । इसके कारण आयोग अपनी ओर से कुछ नहीं कर पा रहा था । यहां तक कि विशेषज्ञों को भी अपने कामकाज में नहीं जोड पा रहा था और न ही विभिन्न क्षेत्रों के लिए अपनी समितियां बना पा रहा था । भाकपा नेता ने कहा कि नीति आयोग के कार्य क्षेत्र में कुछ और बाहरी हस्तक्षेप भी किया जा रहा था । उन्होंने कहा कि कहा जा रहा है कि श्री पनगढिया ने कोलंबिया विश्वविद्यालय से लिया गया अवकाश पूरा होने और शिक्षण क्षेत्र में लौटने की उनकी इच्छा के कारण इस्तीफा दिया है लेकिन क्या एक अमेरिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर का पद देश के इस महत्वपूर्ण पद से ज्यादा अहम है जिस पर कई बडी हस्तियां रह चुकी हैं । उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को वास्तविक स्थिति देश के समक्ष स्पष्ट करनी चाहिये जो नीति आयोग के अध्यक्ष भी हैं । श्री अंजान ने कहा कि श्री पनगढिया के इस समय नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद से हटने से देश के विकास की गति को नुकसान पहुंचेगा । उनका कहना था कि नोटबंदी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि इससे सकल घरेलू उत्पाद में दो प्रतिशत तक की कमी हो सकती है और मौजूदा हालात को देखते हुए उनकी बात सच लग रही है । ऐसी स्थिति में नीति आयोग के उपाध्यक्ष का इस्तीफा देना ठीक नहीं है ।

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