राज्यसभा सदस्य समय की अहमियत को समझें : नायडू

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नयी दिल्ली 11 अगस्त, राज्यसभा के नये सभापति एम वेंकैया नायडू ने सदस्यों से सदन के कामकाज में बाधा डालकर समय खराब नहीं करने की अपील करते हुए आज कहा कि उन्हें गरीबी उन्मूलन, असमानता, सत्ता के दुरुपयोग और अन्य प्रमुख चुनौतियों से निपटने के लिए चर्चा करने पर जोर देना चाहिए ताकि इन समस्याओं से निपटने के लिए प्रभावी कानून बनाये जा सकें। श्री नायडू ने उनके सम्मान में सदन में करीब दो घंटे तक सदस्यों के उद्गार सुनने के बाद कहा,“ हमारे पास बहुत अधिक समय नहीं होता है। हमें पिछले 70 वर्षों में गंवाए गये अवसरों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ाना चाहिए। हम राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, न कि दुश्मन। इसलिए हमें मिलकर काम करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि संसद में विवेक का स्वर उठना चाहिए। श्री नायडू ने इस बड़ी जिम्मेदारी के लिए उन पर भरोसा जताने पर सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह अब राजनीति से ऊपर हैं और सभी दलों के हैं। उन्होंने कहा कि पिछले महीने जब तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद विदाई ले रहे थे तब उन्होंने कहा था कि सांसद ‘चर्चा और परिचर्चा करें तथा निर्णय लें ’। इसलिए यह अच्छा नहीं है कि सदन उद्दंड राजनीति का क्षेत्र बन जाये। जब सरकार प्रस्ताव करे और विपक्ष विरोध करे ताे सदन को उसका निस्तारण करना चाहिए। नये सभापति ने कहा कि संसद के दोनों सदनों ने बहुत अच्छा काम किया है लेकिन महत्वपूर्ण समय के बर्बाद होने को लेकर लोगों में चिंता है क्योंकि संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण होता है और लोग उसे देखते हैं। उन्होंने कहा कि आज का भारत उभरता राष्ट्र है जिसे अपने विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रभावी कानूनों की जरूरत है। इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि समय का समुचित प्रबंधन हो, जैसा कि कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया है। इससे कुछ छोटे दलों के सदस्यों को भी सदन में अपने विचार रखने का समय दिया जा सकेगा।

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