सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 01 अगस्त

कार्यशाला का आयोजन संपन्न

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सी. आर. डी. ई. कृषि विज्ञान केन्द्र, सेवनियाॅ, जिला  सीहोर में कार्यषाला का आयोजन संपन्न हुआ। कार्यशाला में श्री संदीप चैहान, वैज्ञानिक, कृषि प्रसार, कृषि विज्ञान केन्द्र ने कार्यषाला आयोजन के उद्देष्य पर चर्चा करते हुए मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन, वर्तमान समय की आवष्यकता पर चर्चा की। कार्यक्रम में जे. के. कनौजिया, प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र ने फसलों की सामयिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए सोयाबीन, मूॅग, उडद फसलों के रोगों व कीटों के प्रबन्धन की जानकारी दी। वर्तमान समय में सोयाबीन फसल में पीला विषाणु रोग, गर्डल बीटल, सेमीलूपर, पत्ती धब्बा रोग, कली झुलसा रोग के प्रबन्धन हेतु प्रभावी उपचार पर विस्तार से जानकारी दी। आपने अवगत कराया कि फसल में सोयाबीन मोजेक वायरस, फफूॅद जनित बीमारियाॅ व कीटों का प्रकोप निरन्तर बढ रहा है। उन्होंने स्थिति की अनुषंसा की कि बीटा सायफ्लूथ्रिन 8.49ः  $ इमिडाक्लोरोप्रिड 19.81ः 150 मिली. तथा काॅपर आॅक्सी क्लोराईड 500 ग्राम/एकड की दर से 150 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें। फसल की बढवार न होने की स्थिति में एन. पी. के. 19ः19ः19 या 18ः18ः18 की 01 क्रिग्रा. मात्रा प्रति एकड की दर से पर्णीय छिडकाव करें। फसल की सत्त निगरानी करें। वैज्ञानिकों से परामर्ष करने के उपरान्त ही दवाईयों का उपयोग करें। कार्यषाला में इछावर विधायक, श्री शैलेन्द्र पटेल ने भी सहभागिता की। विधायक श्री पटेल ने कृषकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि कृषि विज्ञान केन्द के भ्रमण के दौरान मै आप लोगों से चर्चा कर पा रहा हूॅ। उन्होने कहा कि कृषि तकनीकों की जानकारी महिलाओं को भी दी जावे, जिसे महिलायें बेहतर ढंग से अपनाकर कृषि आय बढाने में अपना योगदान दे सकती है। किसानों को समझाइष देते हुए आपने कहा कि सभी को कृषि विज्ञान केन्द्र का नियमित अन्तराल से भ्रमण करना चाहिए एवं यहाॅ वैज्ञानिकों द्वारा दी गयी सलाह का अनुसरण करना चाहिए। आपने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि मैं विगत 5 -6 वर्षाें से कृषि विज्ञान केन्द्र का निरन्तर भ्रमण करता हॅू एवं दी गयी सलाह का अनुसरण करने का प्रयास करता हूॅ। कार्यक्रम में श्री संदीप टोडवाल, वैज्ञानिक, मृदा विज्ञान, कृषि विज्ञान केन्द्र ने मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन तकनीकों जैसे - वर्मी कम्पोस्टिंग, नाडेप कम्पोस्टिंग आदि पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। डाॅ. एस. सी. कांटवा, वैज्ञानिक, पशुपालन, कृषि विज्ञान केन्द्र, ने मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन में पशुपालन का योगदान पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यषाला के दौरान कृषकों को कृषि विज्ञान केन्द्र पर प्रदर्षित कृषि तकनीके जैसे सोयाबीन की उन्नत किस्में - जे. एस. 2034, जे. एस. 2029, जे. एस. 2069, आर. वी. एस. 2001-4, मक्का उत्पादन तकनीक, धान उत्पादन तकनीक, अदरक उत्पादन तकनीक, अरहर $ मक्का अन्तरवर्ती फसल तकनीक, बागवानी फसलें आदि का भ्रमण कराते हुए कृषि विविधिकरण हेतु कृषकों को प्रेरित किया। भ्रमण के दौरान कृषकों ने बताया कि हमे भी कृषि विविधीकरण को अपनाने की आवष्यकता है। 

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