भाजपा विरोधी रैली के लिए शरद को मिला न्योता, जदयू को उम्मीद नहीं लेंगे भाग

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पटना 03 अगस्त, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने जनता दल यूनाइटेड(जदयू) के वरिष्ठ नेता शरद यादव को 27 अगस्त की ‘भाजपा भगाओ देश बचाओ’ रैली में आमंत्रित किया है बावजूद जदयू को भरोसा है कि वह पार्टी के रूख से अलग कोई निर्णय नहीं लेंगे । राजद प्रमुख की ओर से वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह तथा पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने आज नयी दिल्ली में जदयू नेता से उनके आवास पर मुलाकात कर रैली में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया है लेकिन उन्होंने औपचारिक रूप से अब तक इस संबंध में कुछ भी नहीं कहा है । ऐसा बताया जा रहा है कि बिहार में बदली हुई राजनीतिक परिस्थिति पर राजद नेताओं ने जदयू नेता श्री यादव के साथ चर्चा की । इसके साथ ही श्री यादव को रैली में भाग लेने के लिये औपचारिक रूप से निमंत्रण भी दिया । उधर राजद नेताओं ने श्री यादव के साथ हुयी मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया । श्री यादव ने हालांकि नयी पार्टी बनाने को लेकर लगायी जा रही अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि वह कोई नया दल बनाने नहीं जा रहे हैं । उन्होंने कहा कि एक बात तो स्पष्ट है कि पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को जनमत मिला था और इसका टूटने का उन्हें अफसोस है । श्री यादव ने कहा कि पिछले बिहार विधान सभा चुनाव में लोगों का महागठबंधन के साथ करार हुआ था लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के साथ हाथ मिलाने से यह करार टूट गया । उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार सही तरीके से चलती तो अच्छा होता । जदयू नेता ने पार्टी की 19 अगस्त को पटना में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के पूर्व नयी दिल्ली में साम्प्रदायिकता के खिलाफ ..सांझी विरासत .. राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया है । इसमें समाजवादी विचार धारा वाले दलों के साथ कांग्रेस , वामदल और जदयू के नाराज नेताओं के भी हिस्सा लेने की संभावना है । वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में अब सबकी नजरें जदयू नेता श्री यादव के अगले पर टिकी हैं। जदयू के प्रवक्ता डा.अजय आलोक ने कहा कि श्री यादव पहले भी नाराज नहीं थे और आज भी नाराज नहीं हैं । जदयू के ही एक अन्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि श्री यादव पार्टी के रूख के अनुरूप ही कार्य करेंगे और उनकी नाराजगी जल्द दूर हो जायेगी । उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 26 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा देकर भाजपा के साथ हाथ मिलाते हुए नयी सरकार बनायी थी । उनके त्याग पत्र देने के साथ ही पिछले विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से सत्ता में आयी महागठबंधन सरकार गिर गयी थी । श्री कुमार ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल राजद नेता और तत्कालीन उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ केन्द्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) के द्वारा प्राथमिकी दर्ज किये जाने के बाद उनपर लगे आरोपों का बिन्दुवार जवाब देने को कहा था लेकिन ऐसा नहीं किये जाने पर उन्होंने महागठबंधन को झटका देते हुए भाजपा के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) की सरकार बनायी थी । 

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