भारत में कपास बुवाई का रकबा 17 फीसदी बढ़ा

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फरीदकोट, 04 सितंबर, देश में विभिन्न कपास उत्पादक राज्यों में व्हाइट गोल्ड का कुल रकबा 119़ 88 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 101़ 72 लाख हेक्टेयर था। कपास सीजन 2017-18 के दौरान देश में अभी तक व्हाइट गोल्ड (कपास) की बुवाई 17 प्रतिशत बढ़ी है। सूत्रों के अनुसार कपास की बुवाई का क्षेत्र बढ़ने का मुख्य कारण कपास सीजन की पैदावार में वृद्धि हुई तथा दूसरी ओर किसानों को कपास का भाव भी अच्छा मिला जिस कारण कपास की बुवाई में वृद्धि हुई। बाजार के जानकार सूत्रों के अनुसार देश में अभी तक चाहे कपास की बुवाई में 17 फीसदी इजाफा हुआ है लेकिन देश में इसका कुल उत्पादन अगले माह तक पता चलेगा। क्षेत्र में अच्छी बारिश भी कपास के लिये वरदान साबित हो रही है। इससे सफेद कीट से भी राहत मिली है। बाजार में कपास सीजन के दौरान मंदडियों का मानना है कि देश में इस बार चार करोड़ गांठ से अधिक पैदावार होगी तथा तेजडियों के अनुसार कपास की पैदावार लगभग 3़ 50 करोड़ से 3़ 55 करोड़ गांठें पैदावार होगी। भारतीय रूई बाजार में राजस्व की तंगी चल रही है जिससे स्पिनिंग मिलें बहुत कम रूई खरीद रही हैं। स्पिंनिंग मिलें अपनी रोजाना खपत से कम रूई खरीद रही हैं। उत्तर भारत में हरियाणा तथा पंजाब में धीमी गति से नयी आमद शुरू हो गई है तथा कई स्पिनिंग मिलों ने नयी रूई की खरीद भी शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि उत्तरी राज्यों के पंजाब ,हरियाणा,राजस्थान में रूई का अनसोल्ड स्टाक लगभग 5000 गांठ रह गया है। सिंतबर में रूई में मंदी नजर नहीं आ रही क्योंकि हरियाणा,पंजाब में नयी कपास की आमद बनी हुई है। उसकी तुलना में स्पिनिंग मिलों की मांग भी बराबर चल रही है। अनेक स्पिनिंग मिलें धन की तंगी का सामना कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार बड़े घरानों की मिलों का यार्न अच्छा बिक रहा है जिससे उन्हें कोई डर नहीं है। जिन स्पिनिंग मिलों को सरकारी सुविधा प्राप्त हैं, वे बराबरी पर चल रही है लेकिन जिन मिलों को सरकारी सुविधा नहीं है वे भगवान के सहारे चल रही हैं। आज से इसके दामों में कुछ तेजी के आसार हैं।

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