मुंगेर में जदयू नेता को थाना में पेड़ से बांध कर पीटने पर मानवाधिकार आयोग ने लगाया जुर्माना

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मुंगेर 14 सितम्बर, बिहार में सत्तारुढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता को थाना में पेड़ से बांध कर पिटायी करने और झूठे मुकदमें में फंसाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार को 25 हजार रुपये हर्जाना देने का निर्देश दिया है। मुंगेर जिले के कासिमबाजार थाना क्षेत्र के मकसुसुपुर मुहल्ला निवासी जदयू जिला कमेटी के तत्कालीन सचिव नरेन्द्र कुमार सिंह कुशवाहा 15 जून 2013 की शाम जब बाजार से खरीददारी कर घर लौट रहे थे तभी कासिम बाजार थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी दीपक कुमार और अवर निरीक्षक सफदर अली ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद श्री कुशवाहा को पीटते हुए थाना ले गए और वहां एक पेड़ से बांधकर उनके बेहोश होने तक पिटायी करते रहे। बाद में बेहोशी की हालत में पुलिस ने उन्हें मुंगेर सदर अस्पताल में लावारिश घोषित कर इलाज के लिए भर्ती कर दिया। सदर अस्पताल में आपातकाल सेवा में रात्रि ड्यूटी में तैनात चिकित्सकों ने स्थिति को गंभीर पाकर बेहतर इलाज के लिए उन्हें भागलपुर के सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान श्री कुशवाहा को दूसरे दिन 16 जून 2013 को जब होश आया तब उन्होंने अस्पताल से ही अपने परिजन के माध्यम से मुंगेर के आयुक्त, पुलिस उप महानिरीक्षक, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को फैक्स कर घटना की जानकारी देते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की । इसके बाद कासिम बाजार थाना की पुलिस 18 जून 2013 को दलबल के साथ भागलपुर स्थित सरकारी अस्पताल पहुंची और श्री कुशवाहा को जबरन गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में मुंगेर मंडल कारा भेज दिया। उनपर यह आरोप लगाया कि जदयू नेता के पास से पुलिस ने चार जिन्दा कारतूस बरामद किया है। इस मामले में पटना उच्च न्यायालय से जमानत मिलने तक मुंगेर मंडल कारा में लगभग छः माह तक श्री कुशवाहा बंद रहे। 


जदयू नेता ने मंडल कारा से ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली को अपने साथ हुयी घटना की जानकारी साक्ष्यों के साथ भेज दी। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार को फौरन जांच का आदेश दिया। आयोग के निर्देश के आलोक में बिहार सरकार ने अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के पुलिस अधीक्षक सर्वेश्वर प्रसाद शुक्ला को जांच का आदेश सौंपा। श्री शुक्ला ने मुंगेर पहुंचकर मामले की जांच की और श्री कुशवाहा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया और अपना मंतव्य दिया कि उन्हें साजिश के तहत पुलिस ने फंसाया था। जांच में यह बात उजागर हुई कि पुलिस ने 15 जून 2013 की रात 10 बजकर 15 मिनट में लावारिश घोषित कर श्री कुशवाहा को बेहोशी अवस्था में सदर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किया था। वहीं, दूसरी ओर पुलिस ने उसी तिथि में रात्रि नौ बजकर 30 मिनट में कासिम बाजार थाना में श्री कुशवाहा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया कि उन्हें ठीक इसी समय चार जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया है। इस बीच, जदयू नेता ने आज मुंगेर में कहा कि वह दोषी पुलिस पदाधिकारियों और अन्य लोगो को जेल की सलाखों तक पहुंचाने के लिए अपना आंदोलन जारी रखेंगें । उन्होंने कहा कि आयोग के इस आदेश के बाद उन्हें अब इंतजार है कि पुलिस की ओर से अत्याचार के मामले में आयोग के आदेश के आलोक में दोषी पुलिस पदाधिकारियों और अन्य के विरुद्ध किस प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई की जाती है। 
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